
ईरान (Iran) के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने हाल ही में इज़रायल (Israel) के विस्तार पर बयान देते हुए इसे खतरनाक बताया। अराघची का मानना है कि इज़रायल फिलिस्तीन (Palestine) और लेबनान (Lebanon) में अपनी सैन्य कार्रवाई के नाम पर उनके इलाकों पर कब्ज़ा कर रहा है, जो बहुत खतरनाक है। अराघची ने इस पर रोक लगाने की भी मांग उठाई है।
अराघची ने कहा कि यमन और लेबनान में जो कुछ हो रहा है और फिलिस्तीन में जो नरसंहार चल रहा है, उस पर रोक लगानी चाहिए। ईरानी विदेश मंत्री ने लेबनान और फिलिस्तीन में इज़रायली सैन्य कार्रवाई को रोकना ज़रूरी बताया।
अराघची ने यमन (Yemen) में जंग को रोकने की भी मांग उठाई। ईरान की तरफ से कई बार इस मामले में मदद करने का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिससे न सिर्फ यमन में शांति स्थापित की जा सके, बल्कि हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच भी जंग (Houthis-Saudi Arabia Conflict) को खत्म किया जा सके।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने कुछ हफ्ते पहले प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने के का प्रस्ताव दिया है। बघाई ने कहा, "हूतियों और सऊदी अरब के बीच जो हो रहा है उसकी वजह से अरब प्रायद्वीप में बढ़ती स्थिरता से ईरान बहुत चिंतित है। ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने के लिए कूटनीतिक कोशिश करने के लिए तैयार है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ रहे तनाव से सिर्फ इज़रायली शासन को फायदा मिलेगा। इलाके में लगातार जारी टकराव इस्लामिक दुनिया के हित में नहीं है, क्योंकि बढ़ते हमलों ने पूरे अरब प्रायद्वीप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हम दो इस्लामिक देशों के बीच संघर्ष और जंग के जारी रहने का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते हैं। जंग बढ़ने से पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े और घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। दो इस्लामिक देशों के बीच लगातार जंग से क्षेत्र का भला नहीं होगा, बल्कि सिर्फ नुकसान ही होगा। हमारे क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) में पहले से ही अमेरिका और इज़रायल की हरकतों की वजह से काफी तनाव है।"