
Pakistan Diplomatic Plan: सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अगस्त 2026 में हुए ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defence Agreement) को बड़ी परीक्षा में डाल दिया है। इस त्रिपक्षीय समझौते (सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए) के तहत प्रावधान है कि किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित कई तेल ठिकानों पर हालिया घातक हूती हमलों के बाद, पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता के आकलन के साथ ईरान से संबंध बिगाड़ने से बचते हुए सऊदी अरब की मदद को लेकर असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब पर हुतियों के बढ़ते हमले पाकिस्तान की उस क्षमता की परीक्षा ले रहे हैं, जिसके तहत उसे ईरान से अपने रिश्ते खराब किए बिना रियाद की रक्षा करनी है। वहीं, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस्लामाबाद की ओर से सैन्य भागीदारी बढ़ाने के गंभीर परिणाम देश के भीतर और सीमा पार, दोनों जगह देखने को मिल सकते हैं।
तुर्की की प्रमुख समाचार एजेंसी 'अनादोलु एजेंसी' की एक रिपोर्ट में कहा गया है, इस्लामाबाद के सामने एक ऐसी दुविधा है जिसमें उसे दो अहम रिश्तों को बचाए रखना है- एक तरफ रियाद के साथ रक्षा और वित्तीय साझेदारी है, तो दूसरी तरफ तेहरान के साथ सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय कूटनीति के मोर्चे पर सहयोग है।
7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' (Mecca Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह समझौता तीनों देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका मकसद "अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करना तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है, ताकि एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।"
सैन्य सहयोग के अलावा, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को वित्तीय मदद देने की भी पेशकश की है, ताकि वह अपने बाहरी वित्त (external finances) के दबाव को संभाल सके। इसमें 3 अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता का वादा और पहले से मौजूद 5 अरब अमेरिकी डॉलर की जमा राशि (deposit) की अवधि बढ़ाना शामिल है।
ईरानी सांसदों ने सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य नजदीकी की आलोचना की है। इस महीने की शुरुआत में, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने पाकिस्तानी सैनिकों की संभावित तैनाती की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह महज एक "अफवाह" है। पाकिस्तान के नेतृत्व ने भरोसा दिलाया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि यह समझौता "रक्षात्मक है और किसी भी देश के खिलाफ नहीं है", जबकि अगले दिन प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसकी सेनाएं यमन में जाकर हूतियों के खिलाफ हमले करने के बजाय सऊदी अरब की रक्षा करेंगी। अंकारा स्थित अनादोलु एजेंसी के लिए रबिया अली ने लिखा है कि शुक्रवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस्लामाबाद ने सऊदी अरब में बड़ी संख्या में सैन्य बल और संसाधन तैनात किए हैं।