
यमन (Yemen) में गंभीर होती जंग के बीच हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच भी तनाव काफी बढ़ चुका है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। हूती विद्रोही सऊदी अरब में न सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि तेल के ठिकानों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एयरपोर्ट्स पर भी हमले कर रहे हैं। ऐसे में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन की सेना के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी (Turki al-Maliki) ने एक बड़ी मांग की है।
अल-मलिकी ने कहा, "हूतियों को नागरिकों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ अपनी सभी आतंकी गतिविधियों को रोकते हुए तुरंत हमले बंद कर देने चाहिए। हमने उन बिजलीघरों, ऊर्जा डिपो और समुद्री घाटों को निशाना बनाया, जो हूती विद्रोहियों के जंग के मकसद में मदद करते हैं।"
अल-मलिकी ने बिना किसी देश का नाम लिए बताया कि हूती विद्रोहियों को क्षेत्रीय पक्षों की मदद से एडवांस टेक्नोलॉजी मिल गई है। अल-मलिकी ने कहा, " हूती पहला ऐसा आतंकी संगठन बन गया है, जिसके पास बैलिस्टिक मिसाइलें, हमलावर ड्रोन्स और विस्फोटकों से लदी स्पीडबोट हैं।"
अल-मलिकी ने कहा कि भले ही हूती विद्रोहियों के पास एडवांस टेक्नोलॉजी और घातक हथियार हैं, लेकिन फिर भी सऊदी अरब और सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के पास हूतियों के खतरों से निपटने की पूरी क्षमता है।
यमन में 2014 के आखिर में संघर्ष शुरू हुआ था और हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई और दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ हो गए। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सरकारी सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। इस वजह से हूतियों और यमन की सेना के बीच भी जंग जारी है।