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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की दो-टूक – ‘बम और मिसाइल नहीं कर सकते सरेंडर के लिए मजबूर’

Iran-US Conflict: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने दो-टूक सुना दी है कि बम और मिसाइल किसी देश को सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
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Oct 15, 2026
Masoud Pezeshkian
मसूद पेज़ेशकियान (Photo - ANI)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच भले ही हमले रुके हुए हैं, लेकिन तनाव पहले की ही तरह बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) देश में मिडटर्म चुनाव के बाद फिर से ईरान पर हमले शुरू कर सकते हैं। हालांकि ट्रंप ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अपनी सेना को तैयारी करने के लिए कह दिया है। एक और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ईरान के खिलाफ 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (Mother of All Bombs) यानी GBU-43/B MOAB (Massive Ordnance Air Blast) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी बीच अब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने एक बड़ी बात कह दी है।

बम और मिसाइल नहीं कर सकते सरेंडर के लिए मजबूर

पेज़ेशकियान ने हाल ही में एक भाषण के दौरान साफ कर दिया कि किसी भी देश को बम और मिसाइल के दम पर डराकर सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ईरान की समाचार एजेंसी के अनुसार पेज़ेशकियान ने अपने भाषण के दौरान कहा, “आप बम और मिसाइल के ज़रिए किसी देश को घुटने टेकने और सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन अगर हम बंटे हुए हैं और अंदर से विभाजित हैं, तो दुश्मन अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा।”

राष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूत करने का रास्ता ढूंढना होगा

ईरानी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “हमें राष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूत करने का रास्ता ढूंढना होगा, जिससे हम आने वाली मुश्किलों का सामना एक साथ मिलकर कर सकें।"

अमेरिका चाहता है ईरान कर दे सरेंडर और सौंप दे अपना तेल

ईरानी अधिकारी मोहम्मद जाफर गायमपनाह (Mohammad Jafar Ghaempanah) ने दावा किया है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान सरेंडर कर दे और अपना तेल अमेरिका को सौंप दे। गायमपनाह ईरान के कार्यकारी मामलों के उपराष्ट्रपति हैं। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका नहीं चाहता ईरान आज़ाद रहे और उसका मकसद ईरानी लोगों की इच्छाशक्ति को झुकाना और ईरानी तेल समेत देश के अन्य संसाधनों पर कब्ज़ा करना है। गायमपनाह ने कहा कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने की थी, लेकिन फिर उसे बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और आख़िरकार युद्ध का कोई भी नतीजा कूटनीति ही निकलेगा।