
हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) दोनों ने ही एक-दूसरे के खिलाफ हमले तेज़ कर दिए हैं। इस वजह से तनाव भी काफी बढ़ गया है और लगातार हमलों की वजह से दोनों पक्षों को काफी नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। ऐसे में अब हमलों को रोकने में मदद करने के लिए ईरान (Iran) तैयार हो गया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने आज एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने के का प्रस्ताव दिया है। बघाई ने कहा, "हूतियों और सऊदी अरब के बीच जो हो रहा है उसकी वजह से अरब प्रायद्वीप में बढ़ती स्थिरता से ईरान बहुत चिंतित है। ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने के लिए कूटनीतिक कोशिश करने के लिए तैयार है।"
बघाई ने आगे कहा, "दोनों पक्षों के बीच बढ़ रहे तनाव से सिर्फ इज़रायली शासन को फायदा मिलेगा। इलाके में लगातार जारी टकराव इस्लामिक दुनिया के हित में नहीं है, क्योंकि बढ़ते हमलों ने पूरे अरब प्रायद्वीप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हम दो इस्लामिक देशों के बीच संघर्ष और जंग के जारी रहने का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते हैं। जंग बढ़ने से पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े और घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। दो इस्लामिक देशों के बीच लगातार जंग से क्षेत्र का भला नहीं होगा, बल्कि सिर्फ नुकसान ही होगा। हमारे क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) में पहले से ही अमेरिका और इज़रायल की हरकतों की वजह से काफी तनाव है।"
यमन के हालात पर बघाई ने कहा कि इस विवाद को दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के ज़रिए पहले ही सुलझा लिया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच एक रोडमैप पर सहमति बनी थी और ईरान ने तय किए गए उपायों को लागू करने का समर्थन किया था।
हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) और सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल-सऊद (Faisal bin Farhan Al-Saud) के बीच भी हाल ही में बातचीत। इस दौरान दोनों ने विस्तार से इस मामले पर चर्चा की और शांति की अहमियत पर सहमति जताई।