
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच युद्ध की सबसे बड़ा कारण ईरान का परमाणु प्रोग्राम था। अमेरिका इसके सख्त खिलाफ था, तो वहीँ ईरान ने साफ कर दिया था कि वो परमाणु हथियार बनाना नहीं चाहता, बल्कि सिर्फ परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है जिसका इस्तेमाल अपने देशवासियों की भलाई के लिए किया जा सके। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। अब इस मामले पर बातचीत के बारे में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने बड़ा बयान दिया है।
बघाई ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान के डिप्लोमैटिक रुख को साफ करते हुए कहा, "ईरान, अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार है, लेकिन पुरानी शिकायतों को भुलाकर या ज़मीनी हकीकत को नज़रअंदाज़ करके इसकी शुरुआत नहीं करेगा। हम कभी भी शुरुआती स्थिति में वापस नहीं जाएंगे। क्या आप पिछले दो सालों के अनुभवों को नज़रअंदाज़ करके यह कह सकते हैं कि हम वापस वहीं आ गए हैं जहाँ से यह शुरू हुआ था? इसके लिए शर्तें ज़रूरी हैं। हर गुज़रते दिन के अनुभव का हम ज़रूर इस्तेमाल करेंगे - चाहे वो अपनी क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए हो या दूसरी तरफ की गलतियों से सीखने के लिए।"
बघाई ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान बातचीत से पीछे नहीं हटा है और कूटनीति को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ एक ज़रूरी साधन मानता है। बघाई ने कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि हम कभी भी बातचीत और कूटनीति से पीछे नहीं हटेंगे। हमारे लिए कूटनीति उतनी ही ज़रूरी है जितना कि युद्ध का मैदान और जंग। हम ईरान के हितों की रक्षा के लिए, जहाँ भी ज़रूरी और मुमकिन होगा, कूटनीति के तरीकों का ज़रूर इस्तेमाल करेंगे।"
अमेरिका के सैन्य दबाव, प्रतिबंध और आर्थिक युद्ध के इस्तेमाल पर निशाना साधते हुए बघाई ने सवाल किया, "इस स्थिति के लिए जिस पक्ष को पूरी तरह ज़िम्मेदार और जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, वो वही पक्ष है जिसने बातचीत के बीच में ही बातचीत को खत्म कर दिया और अपनी पिछली ज़्यादतियों पर अड़ा हुआ है। कोई बातचीत करने और कूटनीतिक होने का दावा कैसे कर सकता है, जबकि उसने आर्थिक युद्ध को और बढ़ा दिया है, असल में युद्ध जैसे हालात बनाए रखे हैं, और फिर दावा करता है कि वो बातचीत करना चाहता है?"