
Strait of Hormuz News: पश्चिम एशिया में लड़ाई अब सिर्फ मिसाइलों या सेना पर नहीं टिक गई है। अब इसमें तकनीक और अर्थव्यवस्था भी शामिल हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि वो ईरान पर आर्थिक और सैन्य दोनों तरीकों से दबाव डाल रहे हैं। दूसरी तरफ, होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की धमकी आई है, जिसकी वजह से लोग परेशान हैं कि कहीं हालात और न बिगड़ जाएं। इसी बीच यमन और गाजा से लगातार जानलेवा हमलों की खबरें आ रही हैं जिससे पहले से ही अस्थिर माहौल और मानवीय संकट और गहरा गया है।
ट्रंप का दावा साफ है ईरान को अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों स्तर पर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भी चर्चा की और कहा कि पुतिन इस मामले में दूरी बनाए हुए हैं और खुलकर कुछ नहीं कर रहे। ट्रंप के इन शब्दों से साफ पता चलता है कि वाशिंगटन फिलहाल तेहरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। लेकिन ये दावे हकीकत में कितना असर करेंगे या हालात कब तक ऐसे बने रहेंगे इसका अंदाजा किसी को नहीं।
अब होर्मुज की बात करें तो ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने खुलकर धमकी दी है। अगर अमेरिकी हमले ईरान की सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य में समंदर के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाया जाएगा। ये धमकी इसलिए डराने वाली है क्योंकि यही केबलें दुनिया भर की इंटरनेट, डेटा ट्रांसफर और दूरसंचार व्यवस्था की रीढ़ हैं। अगर ये केबल कट गईं तो सिर्फ कुछ देशों का नुकसान नहीं होगा। पूरा डिजिटल सिस्टम और कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। ऊपर से, होर्मुज वैसे भी तेल की सप्लाई के लिए जरूरी रास्ता है। यहां तनातनी बढ़ी तो एनर्जी सप्लाई से लेकर जहाजरानी तक हर चीज महंगी पड़ जाएगी।
यमन में जो हुआ, वो हालात की गंभीरता दिखाता है। 19 अक्टूबर 2026 को रॉयटर्स ने बताया कि शबवा प्रांत में हूती विद्रोहियों ने एक सरकारी सुरक्षा ट्रेनिंग कैंप पर मिसाइल से हमला किया। गवर्नर अवाद अल-वजीर ने कहा, इसमें 58 लोग मारे गए, 200 से ज्यादा जख्मी हैं और 14 लोग अभी तक लापता हैं। कई घायल जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। ये जब हुआ, उस वक्त फिर से यमन सरकार और हूती विद्रोही आमने-सामने आए और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास तनाव नया सिर उठा रहा था। इससे लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई है।
गाजा की भी हालत अलग नहीं है। यहां इजरायली हमलों में कम-से-कम पांच फिलिस्तीनी मारे गए, जिनमें दो बच्चे भी थे। मेडिकल सूत्र बताते हैं कि यहां हर रोज हिंसा के बीच आम लोग खतरे में हैं। युद्धविराम की कोई उम्मीद दिखना मुश्किल है, और यही सबसे बड़ी चुनौती है।
सारी दुनिया की नजरें इस वक्त पश्चिम एशिया के तेल, व्यापार और अमन पर टिक गई हैं। अब हालात ऐसे हैं कि अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है तो तेल की सप्लाई और समुद्री परिवहन दोनों पर असर पड़ता है, ऊपर से अगर संचार केबल कट जाएं तो डिजिटल सेवाएं भी रुक सकती हैं। भारत जैसे देश जो अपनी एनर्जी बाहर से लाते हैं, उनके लिए महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत सबकुछ बढ़ जाता है। सवाल अब यही है क्या सैन्य टकराव की जगह कोई कूटनीतिक हल निकलेगा या ये आग और भड़केगी और ज्यादा देशों को अपनी गिरफ्त में ले लेगी?