
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन अब इजराइल से तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा है कि इजराइल जून में हुए फ्रेमवर्क समझौते का पालन नहीं कर रहा। राष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में रोजाना हो रहे उल्लंघन लेबनानी सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
बता दें कि दक्षिणी इलाकों में इजराइल सेना की मौजूदगी और लगातार कार्रवाइयां आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। राष्ट्रपति आउन ने कहा कि ये रोजाना के उल्लंघन लेबनान को समझौते की अपनी शर्तें पूरी करने से रोक रहे हैं।
राष्ट्रपति ने खुलकर कहा कि इजराइल अभी भी लेबनान के करीब पांचवें हिस्से पर कब्जा जमाए बैठा है और दर्जनों गांवों को तोड़ दिया गया है। दक्षिण के लोग इस विनाश का सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं।
बता दें कि अमेरिका ने लेबनान और इजराइल के बीच समझौता कराया था। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
समझौते में इजराइल के दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण की बात थी। लेकिन हिजबुल्लाह ने कहा कि जब तक इजराइली फौजें लेबनानी जमीन पर रहेंगी, वह हथियार नहीं डालेगा। इस गतिरोध के कारण समझौता आगे नहीं बढ़ पा रहा।
राष्ट्रपति आउन ने यह भी कहा कि लेबनान कूटनीतिक समाधान के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह रास्ता मुश्किल जरूर है, लेकिन युद्ध से कहीं सस्ता और बेहतर है। लेबनानी लोग, खासकर दक्षिण के निवासी, पहले ही बहुत बड़ी कीमत चुका चुके हैं। अब वक्त आ गया है कि देश को शांति मिले। साथ ही राष्ट्रपति ने यह भी संदेश दिया है कि लेबनान शांति चाहता है, लेकिन उसके लिए इजराइल को भी समझौते का सम्मान करना होगा।
बता दें कि इजराइल लगभग हर रोज लेबनान में हमले करता है। इसमें कई लोगों की मौत भी होती है। इन हमलों को रोकने के लिए लेबनान कई बार अमेरिका से अपील कर चुका है, लेकिन अमेरिका की चेतावनी के बावजूद इजराइल पीछे हटने को तैयार नहीं है।