
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच हुए युद्ध में ईरान ने भले ही डटकर अमेरिका का सामना किया, लेकिन तकनीकी रूप से पीछे होने की वजह से उसे काफी नुकसान भी झेलना पड़ा। अमेरिका तकनीकी रूप से काफी आगे है और इसका फायदा उसे युद्ध में हुआ। युद्ध के क्षेत्र में इसी तकनीकी मुद्दे पर अब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने बड़ा बयान दिया है।
तेहरान के पास एस्लामशहर में स्थानीय शिक्षण संस्थानों के उद्घाटन समारोह में संबोधित करते हुए पेज़ेशकियान ने कहा कि ईरान देश ऐसी तकनीकी बढ़त चाहता है जिससे कोई भी दुश्मन उनके देश पर हमला करने की हिम्मत न करे। पेज़ेशकियान ने तकनीकी बढ़त के महत्व का ज़िक्र करते हुए कहा, "मिसाइल निर्माण समेत उन्नत तकनीकों में ईरान की हालिया उपलब्धियाँ देश के मानव संसाधनों और वैज्ञानिक क्षमताओं की अहमियत को दर्शाती हैं। हालांकि हम मौजूदा स्थिति से कहीं बेहतर कर सकते हैं, जिससे ईरान ऐसी स्थिति में पहुंच जाए जहाँ कोई भी दुश्मन उस पर हमला करने की हिम्मत न करे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सक्षम लोगों को तैयार करने में शिक्षा एक बुनियादी भूमिका निभाती है।”
पेज़ेशकियान ने कुछ दिन पहले एक भाषण के दौरान साफ कर दिया कि किसी भी देश को बम और मिसाइल के दम पर डराकर सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ईरान की समाचार एजेंसी के अनुसार पेज़ेशकियान ने अपने भाषण के दौरान कहा, “आप बम और मिसाइल के ज़रिए किसी देश को घुटने टेकने और सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन अगर हम बंटे हुए हैं और अंदर से विभाजित हैं, तो दुश्मन अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा। हमें राष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूत करने का रास्ता ढूंढना होगा, जिससे हम आने वाली मुश्किलों का सामना एक साथ मिलकर कर सकें।" आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका से युद्ध शुरू होने के समय से ही ईरान का रुख साफ रहा है कि वो कभी भी सरेंडर नहीं करेगा। चाहे कुछ भी हो जाए, ईरान दुश्मन के सामने घुटने नहीं टेकेगा।