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डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से हटाया प्रतिबंध, भारतीय राजनयिक विनय कुमार ने कहा- ऊर्जा आपूर्ति पर हमारा रुख पहले से साफ

Trump tariff exemptions: ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ वाले कानून को टाला, भारत को राहत। राजदूत विनय कुमार बोले, 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे ज़रूरी।
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Oct 17, 2026
Donald Trump on iran
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- वीडियो ग्रैब ANI/X)

Tariffs on Russian oil: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ट्रेश शुल्कों से राहत देने की घोषणा की है। उन्होंने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधो को भी हटाने का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कानून के जरिए कई सख्त कदम उठाने वाले थे। इस दौरान रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर पूरे 100 फीसदी तक टैरिफ (शुल्क) लगाया जाता। इससे रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को काफी आर्थिक नुकसान होता, लेकिन रूसी तेल खरीदने के ऐलान के बाद वह इस मामलों में वैश्विक स्तर पर घिरते जा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

रूसी तेल खरीद पर क्या बोले भारतीय राजदूत विनय कुमार

रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि पश्चिम देशों की आलोचना और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों और यूरोपीय देशों कि टिप्पणी वाले सवाल पर राजदूत ने कहा कि सच्चाई यह है कि 2022 से अब तक यूरोप ने रूस से 320 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा संसाधन आयात किए हैं, जो भारत और रूस के बीच होने वाले व्यापार से कहीं ज्यादा है।

राजदूत विनय कुमार कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद नीति देश की जनता के हितों से तय होती है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमारे लिए नीति और व्यवहार बिल्कुल स्पष्ट है। भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, विविध स्रोत रखना और इन उत्पादों की अनुमानित आपूर्ति सबसे प्रतिस्पर्धी कीमतों पर हासिल करना। यूक्रेन-रूस संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिम (यूरोप-अमेरिका) भारत रूस के व्यापार पर पैनी निगाह रख रहा है।

यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ FTA पर बातचीत जारी

इस बीच, राजदूत विनय कुमार ने बताया कि भारत रूस और अन्य सदस्य देशों को निर्यात बढ़ाने के लिए यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार साल 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

एएनआई से बातचीत के दौरान विनय कुमार ने कहा कि साल 2026 के पहले छह महीने में दोनों देशों के बीच 38 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार में और नए उत्पाद को जोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि भारत रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली मानकों और गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर काम कर रहा है, खासकर कृषि और समुद्री उत्पाद क्षेत्रों में।

अमेरिका की दोहरी नीति

बीते दिनों यह खबर सामने आई थी कि अमेरिका अब रूस से डीजल की खरीद करने जा रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बातचीत के बाद इस समझौते का ऐलान किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका रूस से शुरुआत में करीब 3 लाख टन से ज्यादा डीजल आयात करेगा। फिर नवंबर में 5 लाख टन और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन की खेप तय है। रिफाइनरियों की हालत ठीक रहने पर 30 लाख टन और डीजल भेजा जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी के OFAC ने 7 अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल के आयात की अस्थायी अनुमति भी जारी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर यानी करीब 6.5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी हैं। भारत के लिए यह खबर इसलिए अहम है कि वाशिंगटन लंबे समय से रूसी तेल खरीदने पर भारत को टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकी देता रहा है। हाल ही में पारित कानून के तहत ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता भी खुला है।

कुल मिलाकर अमेरिका का यह कदम रूसी तेल पर उसकी दोहरी नीति को उजागर करता है। भारत के लिए यह कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूत तर्क बन गया था, क्योंकि वह शुरू से कहता आया है कि उसके ऊर्जा फैसले राष्ट्रीय हित और सस्ती आपूर्ति पर आधारित हैं।

Updated on:
17 Oct 2026 08:16 am
Published on:
17 Oct 2026 08:16 am