
अमेरिका में महंगाई पर काबू पाने की कोशिशों के बीच केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने अब ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिका में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। वहीं, महंगाई भी फेड के फिक्स टारगेट से काफी ज्यादा है।
इसके बावजूद दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फेड अक्टूबर में भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन दिसंबर में एक बार फिर दरें बढ़ा सकता है।
रॉयटर्स के ताजा सर्वे में शामिल सभी 100 अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना जताई है। पिछले महीने हुए सर्वे में आधे से भी कम विशेषज्ञों ने ऐसा अनुमान लगाया था। इससे साफ है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है और फेड को आने वाले समय में सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
रॉयटर्स ने 16 से 20 अक्टूबर के बीच सर्वे किया था। इसमें 100 में से 94 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया कि फेडरल रिजर्व 27 और 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखेगा।
सितंबर में फेड ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। अब बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर में कुछ समय तक स्थिति का आकलन करेगा और दिसंबर में अगला फैसला लेगा।
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अक्टूबर में दरें नहीं बढ़ाने का फैसला गलत साबित हो सकता है। मिजुहो सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अमेरिकी अर्थशास्त्री एलेक्स पेले के मुताबिक, मजबूत अर्थव्यवस्था और लगातार ऊंची महंगाई को देखते हुए फेड के पास ब्याज दरें बढ़ाने की पर्याप्त वजह है।
अमेरिका में महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से करीब छह साल से ऊपर बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, आयातित सामान पर लगाए गए नए टैरिफ भी आम लोगों की जेब पर दबाव डाल रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इससे परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ने का खतरा है, जिसका असर आने वाले महीनों में दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सर्वे में करीब 60 प्रतिशत विशेषज्ञों ने अनुमान ने लगाया कि अमेरिकी ब्याज दरें अंततः 4 से 4.25 प्रतिशत के दायरे में पहुंच सकती हैं। वहीं, 92 अर्थशास्त्रियों में से 38 ने अनुमान लगाया कि फेड कम से कम दो बार और ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
रॉयटर्स ने मॉर्गन स्टेनली के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल गैपन के हवाले से बताया कि महंगाई और आर्थिक विकास से जुड़े जोखिम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि फेड को अनुमान से ज्यादा सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बजाय 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का जोखिम भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस बीच, यह अभी अनुमान लगाया गया कि अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो दुनिया भर के बाजारों में महंगाई देखने को मिल सकती है।