
US Launches Airstrikes on Iran: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और खौफनाक रूप लेता जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने बुधवार रात (8 PM ET) ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर हुए ईरानी हमलों के कड़े जवाब में की गई है।
दूसरी ओर, इस सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारी गहमागहमी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन अगर कूटनीति विफल रही, तो अमेरिका "अत्यंत भीषण सैन्य कार्रवाई" करने से पीछे नहीं हटेगा।
जवाबी कार्रवाई में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के पास तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान का आरोप है कि ये जहाज तेहरान द्वारा तय किए गए अनधिकृत समुद्री रास्तों से गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
इसके साथ ही, ओमान द्वारा जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि:
भले ही आसमान से बम बरस रहे हों, लेकिन जंग रोकने के प्रयास भी जारी हैं। 'एक्सियोस' (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान की अगुवाई में कतर, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देश इस विवाद को सुलझाने में जुटे हैं। अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शांति वार्ताओं में शामिल हैं।
कूटनीतिक एजेंडा: इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रूप से फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अटकी वार्ताओं को दोबारा पटरी पर लाना है। हालांकि, ईरान का दावा है कि अमेरिका इस दलदल से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में पसीने बहा रहा है।
दोनों देशों के बीच छिड़े इस युद्ध का सीधा असर दुनिया भर के तेल बाजारों पर देखने को मिल रहा है। वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं।
| मुख्य कारक | विवरण |
| वैश्विक तेल व्यापार | दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल का लगभग 20% से 25% इसी रास्ते से गुजरता है। |
| एलएनजी (LNG) सप्लाई | वैश्विक तरल प्राकृतिक गैस का लगभग 20% हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर जाता है। |
| एशियाई अर्थव्यवस्थाएं | भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश ऊर्जा आयात के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर हैं। |
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह युद्ध अब पारंपरिक जमीनी लड़ाई के बजाय ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और प्रिसिजन स्ट्राइक्स का रूप ले चुका है। दोनों ही देश अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
इस वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत जल्द व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी करने वाले हैं। इस बैठक में ईरान, लेबनान, यूक्रेन और 'अब्राहम अकॉर्ड्स' पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
इस बीच, सऊदी अरब ने रियाद और अपने तेल प्रतिष्ठानों पर ईरान समर्थित गुटों द्वारा किए गए ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार प्रमुख ने लेबनान में इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के कथित उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयम बरतने की अपील की है।