
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव की स्थिति बरकार है। युद्ध का अभी भी स्थायी अंत नहीं हुआ है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) देश में मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला करने का आदेश दे सकते हैं। हालांकि इस बारे में अभी तक पुष्टि नहीं हुई है और मध्यस्थ पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द दोनों देशों के बीच डील हो जाए। इसी बीच ईरान के एक अधिकारी ने बड़ा दावा कर दिया है।
ईरानी अधिकारी मोहम्मद जाफर गायमपनाह (Mohammad Jafar Ghaempanah) ने दावा किया है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान सरेंडर कर दे और अपना तेल अमेरिका को सौंप दे। गायमपनाह ईरान के कार्यकारी मामलों के उपराष्ट्रपति हैं। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका नहीं चाहता ईरान आज़ाद रहे और उसका मकसद ईरानी लोगों की इच्छाशक्ति को झुकाना और ईरानी तेल समेत देश के अन्य संसाधनों पर कब्ज़ा करना है।
गायमपनाह ने कहा कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने की थी, लेकिन फिर उसे बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और आख़िरकार युद्ध का कोई भी नतीजा कूटनीति ही निकलेगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने सोमवार को ईरानी संसद में तेहरान प्रांत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने अधिकारों और हितों का बचाव करने के लिए गंभीरता से कूटनीति का रास्ता अपनाएगा। अराघची ने कहा कि ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए भी उनका देश ऐसा ही करेगा। यह बैठक ईरान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर विधायिका और विदेश मंत्रालय के बीच चल रही बातचीत का हिस्सा थी। अराघची ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का असर कम करने के लिए आर्थिक कूटनीति की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने और साथ ही ईरान के रुख और नज़रिए को समझाने के लिए जन-संपर्क और मीडिया कूटनीति को मज़बूत करने की ज़रूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और खतरों का सामना करने के साथ ही ईरान के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए देश की सभी क्षमताओं को जुटाने के महत्व पर भी जोर दिया।