
हूती विद्रोहियों (Houthis) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) पर हमले तेज़ कर दिए हैं। रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूतियों के हमले में कई लोग हताहत हुए, जिसके बाद एयरपोर्ट पर संचालन को फिलहाल के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में अब यमन की सरकारी सेना, जिसे सऊदी अरब से समर्थन प्राप्त है, ने आज देश के ताइज़ में हूतियों के ठिकानों पर हमले कर दिए।
यमन की सरकारी सेना ने बयान जारी करते हुए बताया कि अल-अरसुम और अल-मराज़िकान इलाकों और ताइज़ के उत्तर में 60वीं स्ट्रीट पर मौजूद आतंकी संगठन हूतियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक्स की गई। इसके साथ ही ताइज़ के पश्चिम में जबल अल-मुनीम और तबात अल-खलवा और शहर के पूर्व में सेंट्रल सिक्योरिटी कैंप को भी निशाना बनाया गया और एयरस्ट्राइक्स की गई। बताया जा रहा है कि इन हवाई हमलों में हूतियों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि अभी हूती विद्रोहियों की तरफ से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यमन की सरकार का मुख्य लक्ष्य देश की राजधानी सना को हूतियों के कब्ज़े से आज़ाद कराना है सना को हूतियों के कब्ज़े से आज़ाद कराना है। कुछ दिन पहले ही यमन के उप-रक्षा मंत्री मेजर-जनरल समीर अल-सबरी (Samir al-Sabri) ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि देश की राजधानी सना को हूतियों के कब्ज़े से आज़ाद कराने के लिए उनकी सेना पूरी कोशिश कर रही है। अल-सबरी ने कहा, "सना अभी भी सीधे तौर पर एक सैन्य लक्ष्य है और सरकारी सेना को इसे हासिल करने के लिए जंग शुरू करने से जो चीज़ रोक रही है वो है समय और सना के आस-पास के इलाकों को पार करने की चुनौती।"
यमन में 2014 के आखिर में संघर्ष शुरू हुआ था और हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई और दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ हो गए। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सरकारी सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है।