
यमन (Yemen) में चल रही जंग तेज़ होती जा रही है। हूती विद्रोही (Houthis) सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों पर हमले कर रहे हैं, तो वहीँ यमन की सेना हूतियों के कब्ज़े वाले इलाकों को निशाना बना रही है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) भी हूतियों के कब्ज़े वाले इलाकों पर हमले कर रहा है, जिसके जवाब में हूती भी सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं। जंग की वजह से हालात बिगड़ते जा रहे हैं और जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम - डब्ल्यूएफपी (World Food Programme - WFP) ने चेतावनी दी है कि यमन में गंभीर होती जंग के कारण 8 लाख लोगों तक खाद्य सहायता नहीं पहुंच पा रही है। जंग के बदलते मोर्चों, बंद सड़कों और सुरक्षा की बिगड़ती स्थितियों की वजह से कई अहम इलाकों तक खाद्य सहायता का पहुंचना बहुत मुश्किल हो गया है।
यमन में चल रही इस जंग का सबसे ज़्यादा असर ताइज़ शहर पर पड़ा है। यह ताइज़ प्रांत की राजधानी होने के साथ ही देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और जंग से सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर है। ताइज़ में जंग, लगातार हो रहे हमलों और सड़कों के बंद होने की आशंका के कारण हज़ारों विस्थापित परिवारों वाले इलाकों तक पहुंचना लगभग नामुमकिन सा हो गया है, जिससे इन परिवारों को काफी परेशानी हो रही है। वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम के अनुसार अकेले ताइज़ में ही 6 लाख से ज़्यादा लोग खाद्य सहायता से वंचित हो गए हैं, जिनमें लगभग 2 लाख महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा यमन के पश्चिमी तट पर भी हाल ही में मदद पहुंचाने में रुकावटें देखने को मिली हैं।
खाद्य सहायता पहुंचाने में यह रुकावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही गंभीर भुखमरी का सामना कर रहे इलाकों में आटे की सप्लाई खत्म हो रही है। इतना ही नहीं, स्थानीय बाज़ारों में स्टॉक भी खाली हो रहा है। इससे बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा होने का डर बढ़ गया है। वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम के अनुसार पूरे यमन में 1.8 करोड़ से ज़्यादा लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है। साथ ही पहुंच वाले इलाकों में भी करीब 74% परिवार अपनी रोज़ाना की भोजन की ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि जंग की वजह से स्थिति काफी बिगड़ चुकी है।