कछुए की चाल में जिला स्टेडियम का निर्माण, दो करोड़ की परियोजना तीन साल बाद भी अधूरी

कछुए की चाल में जिला स्टेडियम का निर्माण, दो करोड़ की परियोजना तीन साल बाद भी अधूरी

shivmangal singh | Publish: Sep, 09 2018 08:42:53 PM (IST) Anuppur, Madhya Pradesh, India

कछुए की चाल में जिला स्टेडियम का निर्माण, दो करोड़ की परियोजना तीन साल बाद भी अधूरी

कछुए की चाल में जिला स्टेडियम का निर्माण, दो करोड़ की परियोजना तीन साल बाद भी अधूरी
जमीनी अड़चनों को निपटाने प्रशासन की नहीं रूचि, आश्वासनों में बार बार निपटाने की प्रक्रिया जारी
अनूपपुर। जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए वर्ष २०१४ में बीआरजीएफ के तहत जिला मुख्यालय में निर्माणधीन जिला स्टेडियम को कछुए की नजर लग गई है, जो पिछले तीन सालों से लगातार निर्माण के बावजूद अपने वजूद में नहीं आ सका है। स्टेडियम निर्माण के लिए नगरपालिका ने प्रस्तावित प्राक्कलन राशि पर लगभग १ करोड़ ८५ लाख रुपए की राशि स्वीकृत दी थी, जिसमें स्टेडियम निर्माण में आनेवाले खर्च पर शासन द्वारा तत्काल ९७ लाख की राशि नगरपालिका को आवंटित कराते हुए मिनी स्टेडियम के निर्माण की अनुमति प्रदान की। शुरूआत समय में स्टेडियम निर्माण का कार्य जोर शोर से आरम्भ भी हुआ। लेकिन शेड निर्माण तथा जमीनों के समतलीकरण के बाद बाउंड्रीबॉल निर्माण में तीन साल गुजर गए। जिसके कारण जिले को स्टेडियम की मिलने वाली सौगात अब नगरवासियों के ख्वाब बनकर रह गए हैं। स्टेडियम की जमीन पर बच्चों की खेलकूद की जगह जंगली घास उगे हुए है। बारिश का पानी जगह जगह कीचर का रूप ले लिया है। बनाए गए लोहे के शेड बारिश के पानी में जंग खा रहे हैं। बावजूद करोड़ों के इस प्रोजेक्ट के पूर्ण निर्माण पर न तो नगरपालिका और ना ही जिला प्रशासन का ध्यान जा रहा है। उल्लेखनीय है कि तुलसी महाविद्यालय तथा आईटीआई भवनों के बीच लगभग १४०/२०० मीटर यानि ६ एकड़ शासकीय भूमि को समतलीकरण कर उसपर मिनी स्टेडियम का निर्माण कार्य आरम्भ हुआ। प्रशासन का मानना था कि दो महाविद्यालय के छात्रों के साथ शहर के बच्चे भी आसानी से स्टेडियम का उपयोग कर सकेंगे। साथ ही जिला स्तरीय खेलों का आयोजन भी किया जा सकेगा। जानकारी के अनुसार छह एकड़ की भूमि पर बनने वाले स्टेडियम को गोलाई रूप में बनाया जाना शामिल था। जिसमें दो मंजिला पेवेलियन भवन, इसमें दो ड्रेसिंग रूम के साथ सुविधाघर तथा पेयजल सुविधा भी शामिल है। साथ ही स्टेडियम में दर्शकों को बैठने के लिए ओपन सीटिंग अरेंजमेंट की व्यवस्था बनाई जाती। जबकि आठ फुट उंची दीवारों के सहारे स्टेपवाईज सीढिय़ा भी बनाया जाना है। लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना का निर्माण अब भी अधूरा पड़ा है।
बॉक्स: कागजों में जमीनी निराकरण, नहीं हुए प्रयास
तुलसी महाविद्यालय की ओर से आने वाली ४ डिसमिल जमीन स्टेडियम के निर्माण में बाधक बनी हुई है। इससे स्टेडियम की गोलाई में आने वाली दीवार प्रभावित हो रही है। नगरपालिका अध्यक्ष रामखेलावन राठौर के अनुसार इसके लिए जिला प्रशासन को पत्राचार कर सम्बंधित जमीन को आवंटित कराई जाने की अपील की गई। लेकिन प्रशासन द्वारा आजतक कोई आश्वासन नहीं दिया गया। जमीनी मामला अब भी रजिस्टरों में बंद है।
बॉक्स: जिला स्तरीय खेल के लिए नहीं मैदान
स्टेडियम के अभाव में जिला स्तरीय खेल आयोजन के लिए जिला मुख्यालय में कहीं स्थान नहीं है। जिसके कारण सालभर में एकाध बार ही जिला स्तरीय खेलों का आयोजन सम्भव हो पाता है। वहीं खेलों के आयोजन नहीं होने युवाओं में खेल भावना को भी बढ़ावा नहीं दिया जा सका है।
वर्सन:
जमीनी अड़चनों के कारण निर्माण कार्य रूका हुआ है। हमने जिला प्रशासन से पत्राचार कर जमीन को आवंटित कराने की अपील की है। लेकिन अबतक जमीन की समस्या का हल नहीं निकल सका है।
रामखेलावन राठौर, नपा अध्यक्ष अनूपपुर।

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