नौ माह के 25 अंगुली वाले आकाश को देखकर हर कोई हो जाता है अचंभित

नौ माह के 25 अंगुली वाले आकाश को देखकर हर कोई हो जाता है अचंभित

Praveen tamrakar | Publish: Sep, 14 2018 04:12:04 AM (IST) Ashoknagar, Madhya Pradesh, India

इंसानी बनावट के अनुसार किसी भी व्यक्ति के हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित कुल 20 अंगुलियां होनी चाहिए।

ईसागढ़. इंसानी बनावट के अनुसार किसी भी व्यक्ति के हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित कुल 20 अंगुलियां होनी चाहिए। यदि बच्चे में 20 अंगुलियों के स्थान पर अंगूठे और अंगुलियों की संख्या मिलाकर 21 या 22 है तो लोग ज्यादा हैरत नहीं मानते। लेकिन यदि कोई बच्चा हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित 25 अंगुलियां लेकर पैदा हुआ है, तो लोगों को अचरज होना स्वभाविक है। 25 अंगुली वाले बच्चे का जन्म लोगों ही नहीं स्वास्थ्य विभाग को भी हैरान करने वाला है।

दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की नजर में एक लाख प्रसूती पर महज पांच मामले ऐसे आते हैं। जिन बच्चों के हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित कुल 25 या फि र इससे ज्यादा अंगुलियां होती हैं। ऐसा ही एक मामला नईसराय कस्बे में देखने को मिला है। जहां एक बच्चे के हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित कुल 25 अंगुलियां हैं। नईसराय तहसील मुख्यालय में म्याना तिराहे पर श्रीराम कुशवाह का परिवार रहता है। श्रीराम ने बताया कि लगभग 9 महीने पहले प्रसव पीड़ा होने पर उनकी पत्नी लीला बाई को नईसराय प्रायमरी हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया था। जहां उसने एक स्वस्थ्य बालक को जन्म दिया।

जन्म के समय बच्चे को किसी ने गौर से नहीं देखा, इसलिए उसके हाथ और पैरों की अंगुलियां के बारे में किसी को पता नहीं चल सका। लेकिन कुछ दिन बाद बच्चे को नहलाते समय उसकी पत्नी लीला की नजर बच्चे के हाथ और पैरों की ओर गई तो वह दंग रह गई। बच्चे के हाथ और पैरों में चार अंगूठे सहित कुल 24 अंगुली थीं। उनकी हैरानी और बढ़ गई जब बच्चे के बांए हाथ के पंजे में स्थित 6 अंगुलियों में से एक अंगुली का नाखून और निकलना शुरू हो गया। उस स्थान पर छोटी अंगुली देखी जा सकती है। इस अंगुली से बच्चे के हाथ और पैरों में चार अंगूठे के अलावा 2१ अंगुलियां हो गई हैं।

&हाथ और पैरों में अंगूठे सहित 21 और 22 अंगुलियां होने के मामले तो आए दिन सामने आते रहते हैं। लेकिन अंगूठे सहित 25 अंगुली होने के मामले एक लाख में महज पांच ही सामने आते हैं। ज्योतिष शास्त्र इन बच्चों को किसी भी रूप में देखता हो, लेकिन विकृत भू्रण के कारण कभी कभार ऐसी स्थिति बन जाती है। इसमें भयभीत होने जैसी कोई बात नहीं है।
डा. रामवीर सिंह रघुवंशी सेवा निवृत सीएमएचओ जिला चिकित्सालय गुना

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