438 जनप्रतिनिधि ऐसे जो खुद हैं किसान, फिर भी समर्थन मूल्य पर नहीं बिकवा सके किसानों का उड़द

कागजों में चली सरकारी खरीद अब किसान बेवस

By: Arvind jain

Published: 19 Jan 2019, 11:05 AM IST


अशोकनगर. जिले में 334 विधायक, 90 जनपद सदस्य, 10 जिपं सदस्य, तीन विधायक और एक जिपं अध्यक्ष सहित कुल 438 जनप्रतिनिधि हैं, जो सभी किसान हैं। इसके बावजूद भी जिले में किसान अपना उड़द सरकारी खरीदी केंद्रों पर नहीं बेच सके और न हीं किसी ने किसानों की समस्या पर गंभीरता दिखाई।

सरकारी केंद्रों ने उनकी उपज नहीं खरीदी और आज सरकारी खरीदी बंद हो जाएगी। किसानों का कहना है कि तीन महीने तक वह अपने घरों पर करीब दो लाख क्विंटल उड़द इस उम्मीद में रखे हुए थे कि सरकारी खरीदी में बिक जाएगा, लेकिन अब उनकी उम्मीदें टूटने लगी हैं। इससे किसानों में अपने जनप्रतिनिधियिों के खिलाफ नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।

किसानों का कहना है कि जहां पहले तो शासन ने समर्थन मूल्य पर उड़द की खरीदी की घोषणा की तो जिले के 35 हजार किसानों ने उड़द बेचने के लिए पंजीयन भी करा लिया। बाद में खरीदी शुरू होने के इंतजार में करीब डेढ़ महीने तक घरों पर उड़द रखे रहे, लेकिन खरीदी सिर्फ कागजों में ही चली। किसान मनोज श्रीवास्तव के घर 40 क्विंटल, जहीर खान के पास 36 क्विंटल, कंछेदी साहू के पास 28 क्विंटल, मोहरसिंह के पास 30 क्विंटल, रॉबिन्स साहू 56 क्विंटल, फूलसिंह यादव 20 क्विंटल, जगन्नाथसिंह 34 क्विंटल और उमराव यादव के घर 45 क्विंटल उड़द रखा हुआ है।

यह सिर्फ 10 या 15 किसानों की बात नहीं, बल्कि जिलेभर में हजारों ऐसे किसान है जो सरकारी खरीदी में बेचने के लिए आज तक अपना उड़द घर पर रखकर इंतजार करते रहे। लेकिन पंजीयन होने के बावजूद भी न तो उन्हें मैसेज पहुंचे और न हीं खरीदी केंद्रों पर कोई मिला। किसानों का कहना है कि आज भी जिले के हजारों किसान अपना करीब दो लाख क्विंटल उड़द सरकारी खरीद में बिकने की उम्मीद में घरों पर रखकर इंतजार करते रहे।


किसान बोले अधिकारियों ने भी नहीं दिया ध्यान-
किसानों का आरोप है कि उड़द बेचने के लिए कई किसानों के पास मैसेज आए तो खरीदी केंद्र ही नहीं मिले और जब केंद्र संचालकों से बात की तो किसी ने सर्वेयर के ललितपुर में होना तो किसी ने इंदौर में सर्वेयर होना बताया। लेकिन खरीदी खत्म होने को सिर्फ आज का दिन ही शेष बचा हैं और ज्यादातर खरीदी केंद्र खुले ही नहीं और न हीं केंद्रों पर सर्वेयर पहुंचे। वहीं शिकायत पर अधिकारियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया जो पहले तो चुनाव में व्यस्तता बताते रहे और फिर शिकायत सुनने को तक तैयार नहीं हुए। किसानों का कहना है कि मंडियों में उड़द की रेट 2700 से 2800 रुपए क्विंटल है और अब मजबूरी में उन्हें सस्ती कीमत पर मंडियों में अपनी उपज बेचना पड़ेेगी।


किसानों का आरोप: प्रशासन का रहा ढुलमुल रवैया-
किसानों का आरोप है कि उड़द की सरकारी रेट पर खरीदी कराने में प्रशासन का रवैया शुरुआत से ही ढुलमुल रहा। जो खरीदी शुरू होने की तारीख से एक महीने तक खरीदी केंद्र भी नहीं बना सका और बाद में कई दिन तक कागजों में केंद्र बनते और बदलते रहे। जिले में 19 केंद्र बनाए तो इनमें ज्यादातर सिर्फ कागजों में ही संचालित होते रहे। वहीं मात्र सात केंद्रों ने खानापूर्ति करने सिर्फ 59 किसानों से खरीदी की। जबकि गुना-अशोकनगर जिले को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में हजारों क्विंटल उड़द की खरीदी किसानों से की गई है।

केंद्रों पर यह भी रही मनमानी-
- विभाग और अधिकारियों ने खरीदी शुरू होने से पहले ही अफवाह फैलाना शुरू कर दिया कि जिले में उड़द की क्वालिटी ठीक नहीं है और खरीदी नहीं हो पाएगी।
- उन्नत किस्म और अच्छी क्वालिटी के उड़द को भी रंगों के आधार पर रिजेक्ट बता दिया गया और खरीदी

करने से इंकार कर दिया, किसानों की शिकायत भी नहीं सुनी।
- केंद्रों पर खरीदी की रिपोर्ट न्यून होने के बावजूद भी किसी भी अधिकारी ने केंद्रों का निरीक्षण कर हकीकत जानना तक मुनासिब नहीं समझा।
किसानों की इन समस्याओं पर भी अनदेखी-
- रबी सीजन में किसानों ने समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर चना-मूसर बेचे, लेकिन करीब 10 प्रतिशत

किसानों का अब तक भुगतान नहीं हुआ।
- जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर शासन ने अक्टूबर 2017 में राहत राशि जिले को दी, 20 प्रतिशत किसानों के खातों में अब तक राशि नहीं पहुंची।
- कृषक समृद्धि योजना के तहत मनमाने तरीके से किसानों का रकबा घटा दिया, लेकिन बोनस राशि अब तक किसानों को नहीं दी।
इनका कहना है-
जिले में सरकारी खरीदी न होने से हम दो बार कलेक्टर से मिले, उन्होंने आश्वासन दिया। लेकिन किसानों का उड़द नहीं खरीदा गया, इस पर हमने शुक्रवार को अपर कलेक्टर को भी ज्ञापन देकर खरीदी कराने की मांग की। अनिल रघुवंशी, जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा

हमने शिकायत की तो कलेक्टर ने समिति प्रबंधकों की बैठक ली। समिति प्रबंधक गांवों में पहुंचे और कुछ किसानों के उड़द का सेंपल ले गए और बाद में कह दिया कि उड़द रिजेक्ट है। खरीदी नहीं की। अब खरीदी बंद होने की स्थिति में है।
सुरेंद्र रघुवंशी, जिलाध्याक्ष किसान कांग्रेस

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