China: यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा देंगे 1.1 करोड़ छात्र, कोरोना से सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त

Highlights

  • महामारी (Coronavirus) के फैलने के बाद पहली बार बड़ी संख्या में छात्र एक साथ बैठेंगे। ऐसे में कोरोना न फैले, इसके लिए इंतजाम किए गए हैं।
  • परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले छात्रों का बॉडी टेम्परेचर (Body Temperature) चेक किया जाएगा। इसके साथ क्लास में बेंचेज को सैनिटाइज (Sanitize) भी किया जाएगा।

By: Mohit Saxena

Updated: 07 Jul 2020, 06:39 PM IST

बीजिंग। कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव को लेकर लगे लॉकडाउन (Lockdown) के कारण चीन में शिक्षण संस्थान बंद पड़े थे। अब इन्हें दोबारा खोल दिया गया है। चीन में मंगलवार से विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (Entrance Exams) शुरू हो गई है। इस परीक्षा में करीब 1.1 करोड़ छात्र हिस्सा लेंगे। दो दिन आयोजित होने वाली यह प्रवेश परीक्षा विद्यार्थियों के भविष्य को तय करेगी। महामारी की वजह से ये प्रवेश परीक्षाएं अपने तय समयसीमा पर नहीं हो पाईं थीें। इस कुछ सप्ताह देरी के बाद इसे आयोजित किया गया है।

कोरोना न फैले इसके लिए इंतजाम किए गए हैं

इस परीक्षा में महामारी के फैलने के बाद से पहली बार बड़ी संख्या में छात्र एक साथ बैठेंगे। ऐसे में कोरोना न फैले इसके लिए इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा के दौरान सुरक्षा के कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें प्रशासन ने संक्रमण को रोकने का प्रयास शुरू किया है और कड़े नियम लागू किए हैं। इनमें से एक है स्वस्थ होने का सबूत देना। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करना शामिल है।

परीक्षा केंद्रों तक छात्रों को अपना मास्क पहनकर आना होगा। इसके बाद ही परीक्षा केंद्र पर उन्हें एक नया मास्क दिया जाएगा। ये मास्क फ्री होगा। परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले छात्रों का बॉडी टेम्परेचर चेक किया जाएगा। इसके साथ क्लास में बेंचेज को सैनिटाइज भी किया जाएगा।

चीन में कोरोना से अब तक 4,634 लोगों की मौत

राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद के अनुसार चीन में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के आठ नए मामले सामने आए हैं। ये सभी लोग देश से बाहर से आए हैं। चीन में महामारी की वजह से अब तक 4,634 लोगों की मौत हुई है। जबकि 83,565 लोग संक्रमित हुए हैं। चीन को कोरोना का जनक माना जाता है। यहां के वुहान शहर में कोरोना वायरस महामारी पैदा हुई थी। बताया जाता है कि वायरस चीन की लैब में तैयार किया है। अमरीका का आरोप है कि इस वायरस के फैलने के बाद इसे काफी दिनों तक छिपाए रखा गया। यहां तक विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी झूठ बाला गया। मगर जब ये फैलने लगा तब चीन इसे जानलेवा वायरस बताया।

WHO ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस वायरस की पहचान 31 दिसंबर को हुई थी। चीन ने उसे इस बारे में सूचित किया था। लेकिन WHO अपनी बातों से पलट गया है। अब उसका कहना है कि चीन में WHO के कंट्री ऑफिस को मीडिया में वुहान नगरपालिका स्वास्थ्य आयोग के हवाले से आई खबरों से ‘वायरल नियोनिया’ के बारे में पता चला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बड़ी चालाकी विवादों में घिरी इस टाइमलाइन को हटा दिया है। सीधे शब्दों में कहें तो अब उसका यह कहना है कि चीन ने 31 दिसंबर को वायरस के बारे में कोई सूचना नहीं दी।

Mohit Saxena
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