अयोध्या के रामलला मेले पर कोरोना वायरस की नजर, टूटी हजारों वर्षों की परंपरा

अयोध्या में हजारों वर्षों से चलने वाले रामनवमी मेले का परंपरागत आयोजन पर कोरोना वायरस की नजर लग गई। जिस वजह से रामलला का यह मेला इस बार सिर्फ मंदिरों तक ही सिमट कर रह गया।

अयोध्या. अयोध्या में हजारों वर्षों से चलने वाले रामनवमी मेले का परंपरागत आयोजन पर कोरोना वायरस की नजर लग गई। जिस वजह से रामलला का यह मेला इस बार सिर्फ मंदिरों तक ही सिमट कर रह गया। रामलला का उत्सव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के जन्म उत्सव के साथ समाप्त होता है। इस बार रामलला का यह उत्सव मंदिरों तक ही सिमटकर रह गया। इस उत्सव में न कोई भक्त शामिल हो सका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील के बाद कोरोना वायरस की वजह से श्रद्धालु अपने घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते है।

राम नगरी अयोध्या में शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च से रामनवमी मेला का आगाज हो गया है लेकिन इस मेले में न ही कोई उत्सव का आयोजन हुआ, न ही इस उत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। यह उत्सव सिर्फ मंदिरों के ग्रह तक ही सिमटकर रह गया। 2 अप्रैल को रामलला का जन्मोत्सव मंदिरों के ग्रह में मनाया जाएगा। अयोध्या के कनक भवन, भगवान श्रीराम लला जन्मभूमि से लाइव प्रसारण के माध्यम से ही श्रद्धालु भगवान का दर्शन कर सकेंगे। अयोध्या के संतों की माने तो यह पहली बार होगा जब भगवान श्रीराम के जन्म उत्सव का होने वाला भव्य आयोजन नहीं किया जा सका।

आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सैकड़ों वर्षों में पहली बार राम नवमी उत्सव पर श्रद्धालु भगवान तक नही पहुंच सकेंगे और न ही उनके उत्सव में शामिल हो सकेंगे। कोरोना के कारण पीएम नरेंद्र मोदी ने जो अपील की उसे आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। आज यह कोरोना महामारी पूरे विश्व में व्यप्त है। इसलिए इस वर्ष राम नवमी के उत्सव को भक्त अपने घरों में मनाएंगे। आज यह महामारी भक्तों को उनसे दूर रखेगी। पर अगले वर्ष इस उत्सव को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।

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