अयोध्या में मंदिर के साथ ही सबसे बड़ा राम म्यूजियम भी बनेगा

-समतलीकरण में मिले पुरावशेषों को रखा गया संग्रहालय में
-अयोध्या के पुराने इतिहास और राम के वैभव का होगा दर्शन

By: Mahendra Pratap

Published: 23 May 2020, 11:06 AM IST

पत्रिका एक्सक्लूसिव
अयोध्या. रामलला परिसर में भव्य मंदिर निर्माण के लिए चल रहे समतलीकरण में हर रोज पुरावशेष मिल रहे हैं। इन पुरावशेषों को संरक्षित किया जा रहा है। विहिप और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की योजना भव्य राममंदिर निर्माण के साथ ही परिसर या फिर इससे लगे अन्य स्थल पर विशालकाय राम म्यूजियम बनाने की है। निर्माण स्थल के समतलीकरण में मिले पुरावशेष पुरातात्विक महत्त के हैं। इन्हें संग्रहालय में रखकर अयोध्या के पुराने इतिहास और श्रीराम के वैभव से जनता को रू-ब-रू करवाया जाएगा।

अयोध्या विवाद के बीच रामलला परिसर में कई साल पहले खुदाई हुई थी। तब यहां मंदिर से जुड़े तमाम पुरावशेष मिले थे। तब इन्हें भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग ने संरक्षित रखवा दिया था। अब यह राज्य संपत्ति विभाग की संपत्ति है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास रामलला से जुड़ा कोई पुरातात्चिक पत्थर, मूर्तियों के टुकड़े आदि नहीं थे। लेकिन अब जब समतलीकरण में पुरावशेष मिल रहे हैं। और मंदिर निर्माण के समय नींव की खुदाई आदि में और पुरावशेषों के मिलने की उम्मीद है तो ट्रस्ट इन पुरावशेषों को विशाल संग्रहालय में रखने की योजना पर मंथन कर रहा है।

मंदिर के हिस्सा हो सकते हैं पुरावशेष:- 11 मई से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में शुरू हुए समतलीकरण कार्य में 3 जेसीबी मशीन, एक क्रेन, दो ट्रैक्टर व 10 मजदूर लगे हैं। अब तक यहां से देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश, आमलक, प्राचीन कुआं दोरजाम्ब, कलाकृतियां मेहराब के पत्थर, सात ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ व छह रेड सैंड स्टोन के स्तंभ और 5 फुट आकार के नक्काशीयुक्त शिवलिंग की आकृति प्राप्त हुई है।

अयोध्या शोध संस्थान से लेंगे मदद:- विहिप सूत्रों के मुताबिक राममंदिर के साथ ही ट्रस्ट के साथ भगवान राम से जुड़ा एक विशाल संग्रहालय भी बनाया जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान देश-दुनिया से राम से जुड़े सभी प्रतीकों को एकत्र कर रहा है। शोध संस्थान की सहमति से इन पुरावशेषों को भी इसी संग्रहालय में रखा जाएगा। भगवान राम की जिंदगी पर बन रहे अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय की भी इस काम में मदद ली जाएगी। अयोध्या के संत समाज ने भी पुरावशेषों को संग्रहालय में रखने की मांग की है।

कार्बन डेटिंग से पता चल सकती है उम्र :- समतलीकरण के दौरान मिले पुरावशेषों के समय को लेकर विवाद छिड़ गया है। माना जा रहा है कि राज्य पुरातत्व संग्रहालय इन पुरावशेषों की कार्बन डेटिंग करा उनकी सही उम्र का पता लगाएगा। ताकि पुरावशेषों से अयोध्या के पुराने इतिहास को पुख्ता किया जा सके।

यह काम भी हो रहेे :-
तैयार हो रही रामायण इंसाक्लोपीडिया :- भगवान राम और उनके कार्य के बखान के लिए संग्रहालय के साथ ही उप्र संस्कृति विभाग द्वारा संचालित अयोध्या शोध संस्थान पांच वाल्यूम में इंसाक्लोपीडिया ऑफ रामायण तैयार कर रहा है। इसमें पूरी दुनिया में रामायण गाथा का संकलन होगा। रामायण देशों का समूह बनाने की दिशा में भी काम हो रहा है। विश्व की रामलीलाओं के दस्तावेजीकरण के साथ ही ही भगवान राम से जुड़ी हर चीज का संकलन किया जा रहा है।

100 एकड़ में रामथीम पार्क :- राम की गाथा बखान करने के लिए अयोध्या में 100 एकड़ का एक थीम पार्क भी बनेगा जिसमें रामायण की झांकी दिखेगी। इसमें अयोध्या और लंका दोनों की झलक मिलेगी। यहां मानव निर्मित झील के सहारे 'शबरी गार्डन' से 'अशोक वाटिका' तक दिखाया जाएगा।

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