scriptIn Balod, farmers created a ruckus for fertilizer | सोसायटी में खाद की मारामारी, कम सप्लाई पर किसानों ने किया जमकर हंगामा, कहा आंख मूंदकर बैठीं हैं लापरवाह सरकारें | Patrika News

सोसायटी में खाद की मारामारी, कम सप्लाई पर किसानों ने किया जमकर हंगामा, कहा आंख मूंदकर बैठीं हैं लापरवाह सरकारें

सुबह से किसान खाद आने की जानकारी मिलने के बाद सोसायटी पहुंचे। इससे हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। सोसायटी प्रबंधन पर्याप्त खाद की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

बालोद

Updated: July 29, 2021 05:12:44 pm

बालोद. जिले में लगभग दो सप्ताह के इंतजार के बाद गोदामों में खाद का भंडारण हो रहा है। लेकिन किसानों के मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं है। किसानों को खाद सोसायटियों में आने की जानकारी मिली तो वे वहां पहुंच गए। पर खाद की मारामारी व पर्याप्त खाद नहीं मिलने के कारण परेशान हैं। अब तो सोसायटियों में खाद को लेकर विवाद होने लगा है। बुधवार को जिले के सांकरा (ज) सोसायटी के अलावा अन्य सोसायटी में भी ऐसे हालात देखने को मिले। खाद की रेक आई, लेकिन पर्याप्त सप्लाई न होने से किसान आपस में झगड़ते रहे। वहीं प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया। कई सोसायटी प्रबंधन पर चहेते किसानों यानी बड़े किसानों को उपकृत करने का आरोप भी किसानों ने लगाया। ऐसे में मध्यम व निम्न वर्ग किसान परेशान हो रहे हैं। जो खाद के लिए सोसायटी के चक्कर काट रहे हैं।
सोसायटी में खाद की मारामारी, कम सप्लाई पर किसानों ने किया जमकर हंगामा, कहा आंख मूंदकर बैठीं हैं लापरवाह सरकारें
सोसायटी में खाद की मारामारी, कम सप्लाई पर किसानों ने किया जमकर हंगामा, कहा आंख मूंदकर बैठीं हैं लापरवाह सरकारें
सांकरा(ज) में 700 बोरी डीएपी पहुंची
सांकरा ज सोसाइटी की बात करें तो यहां पर सिर्फ 700 बोरी डीएपी की सप्लाई हुई थी। लेकिन किसान ज्यादा थे। कई किसानों को खाद मिल नहीं पाया। सुबह से किसान खाद आने की जानकारी मिलने के बाद सोसायटी पहुंचे। इससे हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। सोसायटी प्रबंधन पर्याप्त खाद की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। भीषम यादव ने बताया कि कई किसानों को बैरंग लौटना पड़ा, क्योंकि 700 बोरी खाद अपर्याप्त थी। किसानों ने कहा कि सावन आ चुका है। बारिश भी धीरे-धीरे हो ही रही है। ऐसे में खाद की ज्यादा जरूरत है।
सरकारी गोदाम खाली, निजी दुकान में महंगा
किसानों ने कहा कि सोसायटी में खाद नहीं मिली तो उन्हें निजी दुकानों से अधिक रेट पर खरीदनी पड़ेगी। कालाबाजारी की भी स्थिति निर्मित हो रही है। कई दुकानदार मुनाफाखोरी पर उतर आए हैं। खाद का रेट शासन के तय मुताबिक न लेकर निजी दुकानदार धीरे-धीरे बढ़ा भी रहे हैं। ऐसे में किसानों के लिए बहुत ही संकट का समय आ गया है। किसानों का आरोप है कि राज्य व केंद्र दोनों सरकार गंभीर नहीं हैं।
सांकरा सोसायटी के अध्यक्ष छगन देशमुख ने कहा कि हमने 105 टन खाद की मांग की थी, लेकिन 30 टन की आपूर्ति हुई। वह भी पूरा नहीं आ रहा है। यूरिया की सप्लाई नहीं हुई, डीएपी बस आया। जिन किसानों ने पहले से परमिट पर्ची कटवाई थी, उन्हीं को वितरण हो पाया। नए किसानों के लिए स्टॉक ही नहीं बचा। इसलिए हंगामे की नौबत आई। किसानों को समझाया गया कि जितना आया है, उतना ही दे पा रहे हैं। शासन प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।

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