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मनरेगा आर्थिक गड़बड़ी मामले में दोषी रोजगार सहायक बर्खास्त और पंचायत सचिव निलंबित

बालोद जिले के गुंडरदेही जनपद पंचायत के तहत आने वाले ग्राम रनचिराई में आर्थिक गड़बड़ी के मामले में रोजगार सहायक और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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मनरेगा आर्थिक गड़बड़ी मामले में दोषी रोजगार सहायक बर्खास्त और पंचायत सचिव निलंबित

मनरेगा आर्थिक गड़बड़ी मामले में दोषी रोजगार सहायक बर्खास्त और पंचायत सचिव निलंबित,मनरेगा आर्थिक गड़बड़ी मामले में दोषी रोजगार सहायक बर्खास्त और पंचायत सचिव निलंबित,मनरेगा आर्थिक गड़बड़ी मामले में दोषी रोजगार सहायक बर्खास्त और पंचायत सचिव निलंबित

बालोद @ patrika. जिले के गुंडरदेही जनपद पंचायत के तहत आने वाले ग्राम रनचिरई में आर्थिक गड़बड़ी के मामले में रोजगार सहायक और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

जिला पंचायत सीईओ ने की कार्रवाई
जिला पंचायत सीईओ ने बुधवार को जांच में दोषी पाए जाने की पुष्टि के बाद रोजगार सहायिका बिंदु साहू को पद से बर्खास्त और सचिव दिनेश निषाद को निलंबित करने के आदेश दिए है। दोनों के खिलाफ मनरेगा मस्टररोल पर फर्जी हाजरी लगाकर एक लाख 69,400 रुपए गबन का आरोप लगा था। इस गंभीर मामले को पत्रिका ने लगातार प्रकाशन कर शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया था। पत्रिका में खबर प्रकाशन के बाद प्रशासन ने मामले की जांच की और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की है।

रोजगार सहायिका से वसूला 1.6 9 लाख रुपए
रोजगार सहायिका बिंदु साहू द्वारा मनरेगा में गड़बड़ी व फर्जी हाजरी भरकर एक लाख 6 9 हजार रुपए आहरण के बाद अब जिला पंचायत के आदेश पर गुंडरदेही जनपद ने रोजगार सहायिका से राशि वसूलकर बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की।

भाठागांव में जनसुनवाई, 20 ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव रहे उपस्थित
इधर गुंडरदेही जनपद पंचायत के अंतर्गत 20 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2017-18 व 2018 -19 में मनरेगा मजदूरी भुगतान नहीं होने की शिकायत पर बुधवार को ग्राम भाठागांव में जन सुनवाई हुई। पीठासीन अधिकारी हेमंत ठाकुर, सोशल ऑडिट डायरेक्टर गड़ेकर, सीईओ शैलेश भगत की उपस्थिति में सुनवाई हुई। इस मामले में सभी 20 पंचायतों में लगभग एक लाख रुपए की मजदूरी भुगतान न होने की जानकारी दी। कुछ मजदूरों को तकनीकी खराबी के कारण राशि का भुगतान नहीं होना पाया गया। जल्द सभी समस्या दूर कर का भरोसा पीठासीन अधिकारी ठाकुर द्वारा दिलाया गया है।

सोशल ऑडिट में हुआ था गड़बड़ी उजागर
जानकारी के मुताबिक गांव में चार माह पहले ही सोशल आडिट हुआ था जिसमें पंचायत द्वारा मनरेगा में गड़बड़ी की जानकारी हुई। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर से शिकायत की थी। मामले में जांच रिपोर्ट में रोजगार सहायिका और सचिव दोनों दोषी पाए गए।