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Republic Day: छत्तीसगढ़ के दो सैन्य ग्राम, जहां कदम रखते ही सुनाई देती है शहीदों और वीर सैनिकों की वीर गाथा, ऐसा देश है मेरा...

Republic Day 2022: हम बात कर रहे हैं जिले के ग्राम नेवारीखुर्द की। गांव के 80 से अधिक जवान विभिन्न सैन्य संगठन में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

 

बालोद

Updated: January 26, 2022 08:31:53 am

सतीश @रजक बालोद. पूरा देश 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। ऐसे में बालोद जिले के दो ऐसे गांव हैं, जो गण तंत्र, जवानों एवं ग्रामीणों के सहयोग से प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। हम बात कर रहे हैं जिले के ग्राम नेवारीखुर्द की। गांव के 80 से अधिक जवान विभिन्न सैन्य संगठन में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं। इस गांव को सैनिक ग्राम के रूप में भी जाना जाता है। दूसरा है ग्राम पैरी जिसे सैन्य व शहीद ग्राम के रूप में पहचान मिली। इस गांव में प्रदेश का पहला ग्रामीण अंचल शहीद गार्डन जनसहयोग से बनाया जा रहा है। इन दोनों गांव की चर्चा जिलेभर में हो रही है। देश प्रेम व देश भक्ति का जज्बा छोटे बच्चे से लेकर युवा, बुजुर्ग व हर ग्रामीणों में देखने को मिलती है। युवाओं व ग्रामीणों में देशभक्ति का जुनून देख प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, जिले के जनप्रतिनिधि व जिला कलेक्टर ने भी इस गांव की सराहना की है।
छत्तीसगढ़ के दो सैन्य ग्राम, जहां कदम रखते ही सुनाई देती है शहीदों और वीर सैनिकों की वीर गाथा, ऐसा देश है मेरा...
छत्तीसगढ़ के दो सैन्य ग्राम, जहां कदम रखते ही सुनाई देती है शहीदों और वीर सैनिकों की वीर गाथा, ऐसा देश है मेरा...
गांव के 80 युवक फौज में
बालोद जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर ग्राम नेवारीखुर्द जिसे सैन्य ग्राम कहा जाता है। दरअसल इस गांव के लगभग हर एक घर पीछे एक जवान देश की रक्षा केलिए बीएसएफ, आर्मी, सीआईएसएफ, वायु सेना, पुलिस, सीआरपीएफ सहित विभिन्न सैन्य संगठन में भर्ती होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। सभी 80 जवानों ने मिलकर गांव को विशेष पहचान दिलाने 2 लाख से विशाल व आकर्षक प्रवेश द्वार बनाया है। इस प्रवेश द्वार में भारतीय सेना में शामिल युद्ध में उपयोग होने वाला वाहन भी बनाया गया है। प्रवेश द्वार को देखकर व यहां से गांव में प्रवेश करने पर भी देशभक्ति का उत्साह व ऊर्जा उत्पन्न होती है।
ग्रामीण अध्यक्ष आरके यादव व सरपंच पति राजेन्द्र निषाद ने कहा कि हमें गर्व है कि हम इस गांव के निवासी हैं। हमारे गांव के युवाओं में देशभक्ति का जुनून है। सुबह-शाम गांव के युवा नदी में जाकर सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी करते हैं। खेलकूद में भी युवा आगे हंै। आज जिलेभर में हमारे गांव को सैनिक ग्राम का दर्जा मिला है, ये सिर्फ यहां के जवानों की बदौलत है। आने वाले दिनों में भी कई और युवा सेना में भर्ती होंगे।
छत्तीसगढ़ के दो सैन्य ग्राम, जहां कदम रखते ही सुनाई देती है शहीदों और वीर सैनिकों की वीर गाथा, ऐसा देश है मेरा...शहीद सैन्य ग्राम पैरी
बालोद जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित ग्राम पैरी जिसे आज जिले में शहीद व सैन्य ग्राम कहा जाता है। इस गांव में मातृभूमि सेवा संगठन के नेतृत्व में शासन-प्रशासन, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से शहीद गार्डन का निर्माण किया जा रहा है। यहां जिले सहित अन्य जिले के शहीदों साथ भारत माता की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। प्रतिमा स्थापना व शहीद गार्डन निर्माण का कार्य चल रहा है। पूरे कार्य में लगभग एक से डेढ़ करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। इस गांव के दो जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद हो चुके हैं। वर्तमान में लगभग 65 से अधिक जवान भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा में सेवा दे रहे हैं।
शहीदों की अमरगाथा व जीवनी को जानेंगे लोग
संगठन के संरक्षक रूपेश भारती ने बताया कि जिलेभर में कई युवा सेना में भर्ती होकर भारत माता की रक्षा में देश की सीमाओं पर तैनात हैं। कई बार दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो जाते हैं। ऐसे मामले में जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचता है, तभी याद करते हैं, उसके बाद ऐसे वीर सपूतों को भूल जाते हैं। उनकी स्मृति को संजोने संगठन ने कुछ करने की सोची है। जिले के जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। इसलिए मातृभूमि सैन्य संगठन ने बड़ा निर्णय लिया है। यहां ग्राम पंचायत पैरी से संगठन को मिली जमीन पर शहीदों की प्रतिमा लगाई जाएगी। जिसका कार्य प्रारंभ हो चुका है।
जानकारी के साथ कांच में बंद रहेंगी शहीदों की प्रतिमाएं
संगठन के मार्गदर्शक पूर्व प्राचार्य व राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक सीताराम साहू ने कहा कि हमारा देश, प्रदेश व गांव धन्य है। जहां वीर जवान पैदा हुए। भारत माता की रक्षा करने देश की सीमाओं पर सेवा कर रहे हैं। यहां स्मृति के लिए बनाए जाने वाले भारत माता मंदिर व जिले के शहीदों की प्रतिमाओं को सुरक्षित रखा जाएगा। प्रतिमाएं कांच में सुरक्षित रखी जाएंगी। जहां विवरण होगा कि यह वीर सपूत किस वजह से शहीद हुआ। अभी इसकी तैयारी में संगठन लगा हुआ है। वहीं इनके सम्मान में विविध आयोजन भी रखे जाएंगे।

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