फाइलेरिया के नियंत्रण के लिए पीडि़तों को मार्च से देंगे प्रशिक्षण, प्रबंधन के मिलेगी किट

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में ब्लॉक स्तर पर फाइलेरिया नियंत्रण के प्रभावितों को बीमारी से विकृति से बचाव एवं रखरखाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 27 Feb 2021, 07:03 PM IST

बालोद. राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में ब्लॉक स्तर पर फाइलेरिया नियंत्रण के प्रभावितों को बीमारी से विकृति से बचाव एवं रखरखाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जिला चिकित्सालय में गुरुवार को स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षित किया गया। पुराने फाइलेरिया के मरीजों के साथ स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व मितानिन को घरेलू रोग प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। मरीजों के पैर, हाथ, महिलाओं के स्तन सहित अन्य प्रभावित अंगों की साफ-सफाई का डेमो प्रशिक्षण के दौरान दिखाया जाएगा।

मरीजों को घरेलू रोग प्रबंधन की सामग्री वितरित की जाएगी
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ जीआर रावटे ने बताया कि सीएमएचओ डॉ जेपी मेश्राम के मार्गदर्शन में मरीजों को घरेलू रोग प्रबंधन की सामग्री किट जैसे- साबुन, टावेल, लोशन, टब, मग्गा आदि को वितरित की जाएगी। ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण मार्च के पहले सप्ताह से शुरू होगा। जिले के बीईटीओ रमेश कुमार सोनबोइर, फिजियोथेरेपिस्ट अजय बाम्बेश्वर, लैब टेक्निशियन बीके सोनबोइर व नागेश्वरी साहू आदि को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है।

214 पुरुष हाइड्रोसिल फाइलेरिया से ग्रसित
डॉ रावटे ने बताया फाइलेरिया सर्वेक्षण 2020 में डौंडी में 59, बालोद में 75, डौंडीलोहारा में 137, गुंडरदेही में 30 व गुरुर में 26 सहित 327 मरीजों की पहचान की गई है। पुराने 113 मरीजों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। हाथ में 6, पैर में 85, स्तन में 14 व 8 अन्य अंगों में प्रभावित हैं। फाइलेरिया के मरीजों में 214 पुरुष हाइड्रोसिल से ग्रसित हैं। सभी का स्क्रीनिंग के बाद ऑपरेशन के योग्य मरीजों के हाइड्रोसिल की सर्जरी की जाएगी। हाइड्रोसिल वाले मामले में ऑपरेशन कर जिलों को हाइड्रोसिल मुक्त जिला घोषित करने लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पांच साल के उम्र के बच्चों का रात्रिकालीन सर्वे कर सैंपल लिया जाएगा।

जिलेभर में किया जाएगा सर्वे
स्वास्थ्य विभाग ने फाइलेरिया संवेदनशील एवं असंवेदनशील जिलों में मरीजों की लाइन लिस्टिंग की है। असंवेदनशील जिलों में जहां फाइलेरिया के मरीज पाए गए हैं। वहां माइक्रो फाइलेरिया दर जानने रात में सर्वे किया जा रहा है। डॉ. रावटे ने बताया कि यह बीमारी आमतौर पर बचपन में होती है। यह क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है, लेकिन लक्षण सात-आठ वर्ष बाद दिखाई देते हैं। समय पर इलाज नहीं होने पर यह लाइलाज हो जाता है। इसलिए डीईसी/एल्बेन्डाजोल की दवाई का सेवन वर्ष में एक बार जरूर करें। यह दवा सरकार नि:शुल्क दी जाती है। दो बार दवा लेने पर यह रोग कभी नहीं होता है।

सातवें स्टेज के मरीज को मिलेगा विकलांग प्रमाण पत्र
सातवें स्टेज के मरीज को विकलांग प्रमाण पत्र समाज एवं कल्याण विभाग से जिला मेडिकल बोर्ड की ओर से दिया जाएगा। राज्य सरकार ने एनटीडी (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज) उन्मूलन के लिए 2025 तक फाइलेरिया रोग समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। राज्य में फाइलेरिया के 11044 मरीजों का लाइन लिस्टिंग कर चिन्हित किया गया है। इसमें 5321 लिम्फेडिमा एवं 5723 हाइड्रोसिल मरीज हैं।

हाथीपांव से पीडि़तों के लिए उपाय
अपने पैर को साधारण साबुन व साफ पानी से रोज धोइये। एक साफ व मुलायम कपड़े से अपने पैर को पोंछिए, जितना हो सके अपने पैर को आरामदायक स्थिति में उठाएं और रखें, जितना हो सके, व्यायाम करें, कहीं भी, कभी भी, सोते समय पैर को तकिये के ऊपर, उठा कर रखें, प्रति 6 माह में डीईसी एवं एल्बेन्डाजोल की दवा उम्रवार चिकित्सक के परामर्श के अनुसार लें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।

Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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