किसानों के लिए खुशखबरी: इन पौधों की खेती करने वालों को मिलेगा इस नई योजना का बड़ा लाभ

किसानों के लिए खुशखबरी: इन पौधों की खेती करने वालों को मिलेगा इस नई योजना का बड़ा लाभ

Deepak Sahu | Publish: Sep, 02 2018 05:59:24 PM (IST) Baloda Bazaar, Chhattisgarh, India

इस योजना से किसानों को इन पौधों की खेती करने पर मिलेगा ये बड़ा लाभ

भाटापारा (सूरजपुरा). छत्तीसगढ़ में पहली बार पॉम ऑयल की खेती शुरू होने जा रही है। इसे और आगे बढ़ाते हुए एलोवेरा और खम्हार के पौधारोपण करने की योजना आकार ले चुकी है। योजना से किसानों को आय का अतिरिक्त जरिया मिलेगा और केवल धान की खेती पर निर्भरता भी कम हो सकेगी।

जिले में एलोवेरा, पॉम-ट्री और खम्हार जैसे पौधों की प्रजातियां जिन्हें अब फसलों के लिए चुना गया है। आदेश मिलते ही उद्यानिकी विभाग की नर्सरियों में एलोवेरा और खम्हार के पौधों का वितरण शुरू कर दिया गया है। तो पॉम ट्री के पौधों के लिए रुचि इंडस्ट्रीज़ से संपर्क साधकर पौधों के लिए ऑर्डर दिए गया है। बता दें कि देश की इस उद्योग समूह को पॉम ऑयल उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी उद्योग माना जाता है। जि़ले की भूमि का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसमें नमी भूमि का रकबा अधिक है। इसलिए योजना में ऐसी ही भूमि ली जा रही है।

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योजना के मुताबिक़ 2200 एकड़ में पॉम ट्री और 2200 एकड़ में खम्हार के पौधरोपण होंगे। जबकि एलोवेरा को अंतर्वर्ती फसल के रूप में लिया जा रहा है। इसे पॉम ट्री के समानांतर में लगाया जाएगा। इसमें खम्हार के पौधों का वितरण एक किसान को 500 पौधें देने का लक्ष्य है। बंजर या ऊंची सतह वाली जमीन पर ये पौधे लगाए जाएंगे। उसमें सबसे जल्दी तैयार होने वाला पौधा लोवेरा का होगा। यह सिर्फ 18 से 24 महीने में तैयार हो जाता है। खजूर परिवार का पॉम ट्री भी 5 से 8 साल के भीतर तैयार होगा। खम्हार भले ही 8 से 13 साल में तैयार होगा, लेकिन यह दीर्ध अवधि तक लाभ देने वाला पेड़ बनेगा। यानि बंजर भूमि भी जिले के किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

किसका क्या उपयोग
इन तीनों में सबसे ज़्यादा उपयोगी खम्हार का पेड़ माना गया है। इसकी लकड़ी का उपयोग प्लाईवुड इंडस्ट्रीज़ तो करती ही है साथ ही माचिस निर्माण कंपनियां भी इसकी लकड़ी से माचिस की तिलियां बनाती है। इसे सागौन के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पेड़ माना गया है। चूंकि फल और सब्ज़ी की पैकिंग में काम आने वाले कार्टून बॉक्स भी इन्हीं लकडिय़ों से बनते हैं।

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अब आएं पॉम ट्री की उपयोगिता पर तो खजूर परिवार का यह महत्वपूर्ण सदस्य परिपक्व होने के बाद अपने फल के माध्यम से खाद्य तेल के रूप में हमारे घर पहुँच चुका है याने इसके फल से खाद्य तेल बनाया जाएगा। अब एलोविरा की बात करें। औषधिय गुणों से भरपूर एलोवेरा कई रूप में पहुँच चुका है। इसकी खेती से जि़ले के किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे।

ये हैं खरीदार
उद्यानिकी विभाग ने जो योजना बनाई है, वह दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। पॉम ट्री के फल रुचि इंडस्ट्रीज़ खऱीदेगी। जबकि एलोवेरा की फसल पतंजलि समूह खऱीदेगा। खम्हार ट्री की खरीदी कार्टून बॉक्स निर्माण कंपनियां और प्लाईवुड इंडस्ट्रीज़ करेगी। माचिस निर्माण कंपनियों से भी पूछताछ शुरू कर दी गई है।

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