स्वभाव के अनुसार आत्मा पर प्रभाव डालते हैं कर्म

स्वभाव के अनुसार आत्मा पर प्रभाव डालते हैं कर्म

Shankar Sharma | Publish: Oct, 14 2018 01:45:57 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

महावीर भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि जिस प्रकार विद्यालय में प्रवेश करने वाले सारे विद्यार्थी एक ही द्वार से प्रवेश करते हैं.

मैसूरु. महावीर भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि जिस प्रकार विद्यालय में प्रवेश करने वाले सारे विद्यार्थी एक ही द्वार से प्रवेश करते हैं, परंतु बाद में वे सारे विद्यार्थी अपनी-अपनी कक्षा में विभाजित हो जाते हैं उसी प्रकार आत्मा में प्रवेश करने वाले कर्म भिन्न-भिन्न स्वभाव वाले होने से अपने स्वभाव अनुसार आत्मा पर अपना प्रभाव डालते हैं। जो कर्म की प्रकृति से आत्मा को सुख और अनुकूलता देता है वह पुण्य प्रकृति और जो कर्म की प्रकृति से आत्मा को दुख और प्रतिकुलताएं सहन करनी पड़ती हैं वह पाप प्रकृति है।

डांडिया की धूम
बेंगलूरु. कुडलु गेट राजस्थानी व्यापारी संघ के तत्वावधान में वेंकटस्वामी देवस्थाना कुडलू सर्कल कारपोरेशन बैंक के सामने नवरात्रि महोत्सव में डांडिया का आयोजन किया गया। उपाध्यक्ष बगदाराम बर्फा ने बताया कि युवा और बच्चों ने जमकर डांडिया पर नृत्य किया।

म्हारे जगदंबा रा नाम हजार कैसे लिखूं...
मैसूरु. राजस्थान मित्र मंडल के तत्वावधान में एचडीकोटे में हुणसुर मार्ग स्थित मंगल मंडप में शुक्रवार रात को मां भगवती जागरण आयोजित किया गया। प्रारंभ में मां भगवती की तस्वीर पर पुष्पहार अर्पित कर ज्योत प्रज्वलित किया गया और भोग चढ़ाया गया। पं सतीश ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

धर्मसभा में कलाकार राजेंद्र कुमावत व पार्टी ने नवरात्रि में नवदिन आवे मने घणा, मन भावे जी..., हिरदे मे राखु परदा में राखंू...,मायड़ थारो वो पूत कठे वो एकलिंग रो दिवान कठे वो महाराणा प्रताप कठे..., म्हारे जगदंबा रा नाम हजार कैसे लिखूं कंकुपतरी... आदि राजस्थानी लोक भजनों की प्रस्तुति दी।


मूल मुनि की जयंती मनाई
बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता, साध्वी अमितप्रज्ञा, कमलप्रज्ञा, सौरभप्रज्ञा आदि ठाणा चार के सान्निध्य में उपाध्याय प्रवर मूल मुनि की ९७वीं जयंती जप दिवस के रूप में मनाई गई। सभा में साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि नवकार महामंत्र के चतुर्थ पद पर सुशोभित उपाध्याय प्रवर मूल मुनि का जन्म पाली में हुआ। जन्म से ही धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा व आस्था रखते हैं। उनके पास सरस्वती भंडार की अक्षय निधि है।

साध्वी सौरभप्रज्ञा ने कहा कि जाप दो चीज सिद्धि और प्रसिद्धि देता है। प्रसिद्धि की इच्छा से नहीं, सिद्धि की इच्छा से जाप करते हैं तो पाप, ताप, संताप का क्षय होता है। अष्ट दिवसीय लोगस्स साधना के तृतीय दिवस ३५० श्रावकों ने भाग लिया। बाल संस्कार शिविर में २०० से अधिक बच्चों को व्यसन मुक्त जीवन और संस्कार युक्त जीवन जीने की बात समझाई गई।

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