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जांच एजेंसियों के जरिए दबाव डाल रही केन्द्र : सुरेश

केन्द्र का यह कदम देश के लोकतांत्रिक मूल्योंं के विरुद्ध है।
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 8 Nov 2018, 8:20 PM IST

Dk suresh

जांच एजेंसियों के जरिए दबाव डाल रही केन्द्र : सुरेश

बेंगलूरु. कांग्रेस सांसद डी. के. सुरेश ने आरोप लगाया है कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई तथा आयकर विभाग पर दबाव डाल रही है। केन्द्र का यह कदम देश के लोकतांत्रिक मूल्योंं के विरुद्ध है।

सुरेश ने बुधवार को यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि पार्टी को सूचना मिली है कि केन्द्रीय एजेंसियां उनके भाई व कांग्रेस के प्रभावी मंत्री डी.के.शिवकुमार के खिलाफ पिछली बार मारे गए आयकर छापों के सिलसिले में कार्रवाई करने व उनको गिरफ्तार करने जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी नेताओं को मजबूर करने व पार्टी में शामिल होने के लिए विवश कर रही है और इसके लिए केन्द्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। इससे देश में लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होगी।

संवाददाता सम्मेलन में सुरेश के साथ पार्टी सांसद धु्रवनारायण, मुद्द हनुमेगौड़ा, चन्द्रप्पा, के.सी.राममूर्ति तथा जी. सी. चन्द्रशेखर भी मौजूद थे।

पूर्व सांसद बी. श्रीरामुलु के बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव पूर्व उनका यह कहना कि शिवकुमार जेल जाएंगे और जे.शांता लोकसभा जाएंगी इस बात का प्रमाण है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व क्या सोच रहा है।

उन्हें जानकारी मिली है कि 7 नवम्बर के बाद शिवकुमार सहित विपक्ष के नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी।

यह पूछे जाने पर कि शिवकुमार के खिलाफ कार्रवाई की सूचना उनको कैसे मिली उन्होंने कहा कि वे विवरण का खुलासा नहीं कर सकते। ईडी व अन्य एजेंसियां इस तरह की कार्रवाई करने जा रहीं हैं।

गौरतलब है कि शिवकुमार के दिल्ली स्थित ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों की कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के केस के संबंध में जांच चल रही है।

सुरेश ने हालांकि दावा किया कि ईडी, सीबीआई व आयकर विभाग जैसी केन्द्रीय एजेंसियां भाजपा के इशारे पर काम कर रही हैं और कांग्रेस नेता इनके शिकार हो रहे हैं।

लेकिन, वे इन एजेसियों के सामने सभी प्रकार के स्पष्टीकरण दोने को तैयार हैं।

राज्यसभा सदस्य के.सी. राममूर्ति ने कहा कि कर्नाटक के पार्टी समूह ने 13 सितम्बर को एक पत्र लिखकर ईडी के निदेशक से मिलने का समय मांगा था लेकिन इसकी उपेक्षा कर दी गई और इस बारे में कोई जवाब तक नहीं दिया गया।

यह नियम है कि जब संसद सदस्य अपनी बात कहने के लिए समय मांगे तो उनको मिलने का समय दिया जाना चाहिए। लेकिन 45 दिन बाद भी समय नहीं मिला।

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