प्रकृति और मनुष्य के बीच गहरा संबंध: आचार्य देवेन्द्र सागर

  • जयनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 17 Apr 2021, 06:25 PM IST

बेंगलूरु. राजस्थान जैन मूर्तिपूजक संघ, जयनगर में श्रद्धालुओं के समक्ष प्रवचन में आचार्य देवेंद्रसागरसूरि ने कहा कि प्रकृति और हमारे बीच बहुत गहरा संबंध है। मनुष्य के लिए धरती उसके घर का आंगन, आसमान छत, सूर्य-चांद-तारे दीपक, सागर-नदी पानी के मटके और पेड़-पौधे आहार के साधन हैं। आरोग्य प्रकृति का दिया हुआ एक ऐसा वरदान है जो सभी प्राणियों को समान रूप से मिला है। आज या हजार वर्ष बाद भी इसी निष्कर्ष पर पहुंचना होगा कि प्रकृति के अनुशासन के विपरीत चल कर हमने खुद ही आफत मोल ली है।

हालांकि अन्य जीव-जंतुओं के जीवन में भी दुख-दर्द होते ही हैं, जब-तब शारीरिक पीड़ाओं से भी वे सब गुजरते हैं, पर एक मनुष्य ही है जो आए दिन कराहता, रोता रहता है। अस्पतालों, हकीमों के चक्कर लगा कर भी वह बीमार ही होता जाता है। इसकी एक बड़ी वजह प्रकृति से बनती उसकी दूरी भी है।

उन्होंने कहा कि सभी यह मानकर चलें कि यह बीमारी मानव जाति को एक नई दिशा में ले चलने के लिए प्रकृति की ओर से एक निर्देश प्रदान कर रही है।

हमें भी अपने आप को आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से मजबूत बनाते हुए इस अदृश्य शत्रु को परास्त करना है। हर एक महामारी का, हर संकट का एक समय होता है और यह धीरे-धीरे व्यतीत हो जाता है।

Santosh kumar Pandey Desk
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