इसरो ने किया दो ब्रिटिश उपग्रहों का प्रक्षेपण

इसरो ने किया दो ब्रिटिश उपग्रहों का प्रक्षेपण

Rajeev Mishra | Publish: Sep, 16 2018 10:38:59 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

यह पूर्ण वाणिज्यिक उड़ान थी और इस मिशन में कोई भी भारतीय उपग्रह नहीं छोड़ा गया

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विश्वसनीय रॉकेट धु्रवीय प्रक्षेपण उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी सी-4२) ने एक और सफल उड़ान भरते हुए ब्रिटेन के दो उपग्रहों- नोवासार-1 और एस1-4 को सफलतापूर्वक निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित कर दिया। पीएसएलवी की यह पूर्ण वाणिज्यिक उड़ान थी और इस मिशन में कोई भी भारतीय उपग्रह नहीं छोड़ा गया।
श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लांच पैड से पीएसएलवी सी-42 ने ठीक रात 10.08 बजे उड़ान भरी और अनुमानित प्रक्षेप पथ का अनुसरण करते हुए दोनों उपग्रहों को 583 किलोमीटर सूर्य समकालिक कक्षा (एसएसओ) में पहुंचा दिया। यह मिशन लगभग 18 मिनट चला। प्रक्षेपण के 17 मिनट 45 सेकेंड बाद रॉकेट के चौथे चरण (पीएस-4) से नोवासार-1 अलग हुआ और अपनी कक्षा में स्थापित हुआ। उसके बाद एस1-4 भी अपनी कक्षा में स्थापित हो गया। रॉकेट से अलग होते ही उपग्रहों के सौर पैनल खुल गए और जमीनी केंद्रों से उपग्रह का संपर्क स्थापित हो गया।
इस पूर्ण वाणिज्यिक मिशन के प्रक्षेपण के लिए 33 घंटे की उलटी गिनती शनिवार दोपहर 1.08 बजे शुरू हुई थी। उलटी गिनती पूरा होते ही पीएसएलवी के पहले चरण में दहन पैदा हुआ और रॉकेट ने सटीक उड़ान भरी। पीएसएलवी की कुल मिलाकर यह 44 वीं उड़ान थी और इस बार इसरो ने इस रॉकेट के मूल रूप यानी, कोर अलोन वर्जन का उपयोग किया। कुल मिलाकर 12 वीं बार पीएसएलवी के कोर अलोन वर्जन का इसरो ने उपयोग किया। पीएसएलवी के विस्तारित संस्करण में छह अतिरिक्त स्ट्रैपवंस का उपयोग किया जाता है लेकिन दोनों उपग्रहों का कुल वजन 8 8 9 किलोग्राम था जिसके लिए पीएसएलवी की क्षमता बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी।
इस मिशन के तहत ब्रिटेन के जिन दो उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया उसमें नोवासार एस-बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार उपग्रह है, जो 445 किलोग्राम वजनी है। इसके साथ एस-बैंड सार-पे-लोड और ऑॅटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन रिसीवर है। इसका उपयोग मुख्य रूप से जंगलों के नक्शे, वर्षा से अच्छादित जमीन के निरीक्षण, बाढ़ एवं आपदा निरीक्षण, जहाजों का पता लगाना एवं समुद्री निरीक्षण के लिए किया जाएगा। वहीं एस1-4 एक भू-अवलोकन उपग्रह है। एस1-4 का वजन 444 किलोग्राम है और यह संसाधनों के अवलोकन, पर्यावरण का निरीक्षण, शहरी विकास प्रबंधन, आपदा निरीक्षण आदि के लिए किया जाएगा। इन उपग्रहों का निर्माण ब्रिटिश कंपनी सर्रे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल) ने किया है और प्रक्षेपण के लिए इसरो की वाणिज्यिक इकाई अंतरिक्ष लिमिटेड के साथ करार किया है। इससे पहले इसरो ने एक पूर्ण वाणिज्यिक उड़ान के तहत 10 जुलाई 2015 को पीएसएलवी सी-28 से पांच ब्रिटिश उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण किया था।

मानव मिशन की प्रभारी ललिताम्बिका ने की अंग्रेजी में कमेंट्री

पीएसएलवी सी 42 मिशन के प्रक्षेपण के दौरान एक रुचिकर बात यह रही क इस मिशन के लाइव प्रसारण के दौरान अंग्रेजी में कमेंट्री मानव मिशन की प्रभारी वीआर ललिताम्बिका कर रही थीं। भारत ने वर्ष 2022 में मानव मिशन (गगनयान) लांच करने की घोषणा की है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस मिशन की कमान महिला वैज्ञानिक ललिताम्बिका को सौंपी है।

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