लोकतंत्र की रक्षा के लिए ममता सहित कई नेताओं को पत्र लिखेंगे कुमार

लोकतंत्र की रक्षा के लिए ममता सहित कई नेताओं को पत्र लिखेंगे कुमार

Shankar Sharma | Publish: May, 18 2018 04:49:30 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

एचडी कुमारस्वामी ने वे देश के संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए विभिन्न दलों के राजनेताओं से सहयोग देने की अपील की है।

बेंगलूरु. जनता दल (ध) के प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने वे देश के संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए विभिन्न दलों के राजनेताओं से सहयोग देने की अपील की है। कुमारस्वामी ने गुरुवार को यहां विधानसौधा स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना देने से पहले आरोप लगाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वे देश को स्वच्छ बनाना चाहते हैं लेकिन वास्तव में वे अपनी पार्टी के नेताओं को विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के लिए उकसा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वे विभिन्न राज्यों के विपक्ष के नेताओं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , बसपा प्रमुख मायावती , सहित देश के प्रमुख राजनेताओं को पत्र लिखने जा रहे हैं कि वे इसका कड़ा विरोध करे और देश के संवैधानिक मूल्यों को बहाली के लिए कड़े प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उनको मिली जानकारी के अनुसार मोदी सरकार ने कांग्रेस के विधायक आनंद सिंह को धमकी दी है कि यदि उसने गठबंधन सरकार को समर्थन दिया तो उसके ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालाय का छापा डाला जाएगा।

हालांकि आनंद सिंह कांग्रेस के टिकट पर विजय नगर सीट से चुने गए हैं लेकिन उनको धमकी दी गई है कि यदि उन्होंने पार्टी को समर्थन दिया तो उनको ईडी की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस के बिना शर्त समर्थन के बूते पर सरकार बनाने का दावा कर रहे कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल वजूभाई वाळा ने बहुमत साबित करने के लिए येड्डियूरप्पा को 15 दिन का वक्त देकर भाजपा के विधायकों की खरीद फरोख्त करने का अवसर दे दिया है।

मंत्रियों पर मेहरबान रहा बेंगलूरु
बेंगलूरु. एक ओर कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल रहे आधे उम्मीदववार अपनी सीट बचाने में असफल रहे, वहीं बेंगलूरु शहर से लडऩे वाले सभी छहों को जीत मिली। बेंगलूरु शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से केजे जार्ज, रामलिंगा रेड्डी, रोशन बेग, कृष्णा बैरेगौड़ा, एम कृष्णप्पा तथा पूर्व मंत्री दिनेश गुंडूराव विजयी रहे। इनमें से जार्ज को छोडक़र सभी की जीत का अंतर २०१३ के विधानसभा चुनावों की अपेक्षा कम हो गया।

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