राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव

कई दलों में आंतरिक लोकतंत्र नदारद होता जा रहा है

By: Sanjay Kulkarni

Published: 13 Aug 2020, 10:28 PM IST

बेंगलूरु. राजनीतिक दलों में वैचारिक मंथन होना चाहिए। पार्टी के कार्यकर्ताओं को पार्टी के नेताओं के फैसलों पर असहमति व्यक्त करने की आजादी मिलनी चाहिए। देश के कई दलों में आंतरिक लोकतंत्र नदारद होता जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एसएम कृष्णा ने यह बात कही।

उन्होंने यहां गुरुवार को कहा कि कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल में युवा नेताओं की अनदेखी के कारण कई राज्यों में पार्टी को नुकसान हो रहा है। आलाकमान संस्कृति के कारण पार्टी की जडं़े कमजोर हो रही है। कई राज्यों में पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो रहा है। राजनीतिक दलों को युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को दक्षिण के कई राज्यों में भाजपा की जड़ें मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई साहसिक फैसले लिए हैं। लिहाजा वर्ष 2024 के आम चुनाव में स्पष्ट बहुमत के साथ फिर एक बार मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे।

कन्नड़ फिल्म उद्योग की समस्याएं हल करेगी सरकार

बेंगलूरु. राज्य सरकार कन्नड़ फिल्म उद्योग की समस्याएं सुलझाने की पहल करेगी। इसके लिए जल्दी ही एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन होगा। उप मुख्यमंत्री डॉ.सीएन अश्वथ नारायण ने गुरुवार को अभिनेता शिव राजकुमार को यह आश्वासन दिया।

उन्होंने बताया कि दर्शकों को सिनेमा घर तक लाना मुश्किल काम है।कोरोना के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। दर्शकों को सिनेमा घर तक लाने की एक नई योजना बनाने की जरूरत है। वे अगले सप्ताह मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक करेंगे। जिसमें कलाकार, निर्माता, निदेशक और फिल्म वितरक भी भाग लेंगे।

शिव राजकुमार ने कहा उन्हें विश्वास है कि सरकार सभी समस्याओं को हल करेगी।उद्योग के विकास के लिए सरकार के सामने सिफारिशें रखी जाएंगी।उन्होंने फिल्म उद्योग को बचाने के लिए कोई पैकेज देने की मांग नहीं की। केवल कुछ मांगों को सामने रखा है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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