तेजस में हवा में ही भरा ईंधन

तेजस में हवा में ही भरा ईंधन

Rajeev Mishra | Publish: Sep, 10 2018 06:28:25 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

विश्व के चुनिंदा देशों के विशिष्ट क्लब में भारत, अंतिम परिचालन मंजूरी हासिल करने की दिशा में अहम पड़ाव पार

बेंगलूरु. स्वदेशी तकनीक से विकसित किए जा रहे हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने हवा में उड़ान भरते हुए ईंधन भरने का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वायुसेना के टैंकर विमान आईएल-78 से हवा के मध्य तेजस में ईंधन भर दिया गया। परीक्षण के दौरान तेजस ने एक प्रभावी जंगी जेट के तौर पर अपनी पूरी क्षमता प्रदर्शित की और अंतिम परिचालन मंजूरी (एफओसी) हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया।
तेजस को अंतिम परिचालन मंजूरी मिलने के लिए हवा में ईंधन भरने की क्षमता का होना आवश्यक है लेकिन, इस परीक्षण के सफल होने के बावजूद अंतिम परिचालन मंजूरी हासिल करने के लिए तेजस को कई अभी और परीक्षणों के दौर से गुजरना होगा। वैज्ञानिकों ने इस परीक्षण के दौरान तेजस के सभी तकनीकी बिंदुओं पर नजर रखी जिसमें सभी प्रक्रियाएं सही पाई गईं। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के बाद तेजस की क्षमता बढ़ाने के रास्ते भी खुल गए है। इससे पहले पिछले 4 सितम्बर को तेजस में हवा में ईंधन भरने के परीक्षण का पूर्वाभ्यास किया गया था।
तेजस का उत्पादन करने वाली देश की एक मात्र विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने जानकारी दी है कि तेजस श्रृंखला उत्पादन-8 (एलएसपी-8 ) युद्धक में हवा में उड़ान भरने के दौरान आईएल-78 विमान से 1900 किलोग्राम ईंधन भरा गया। ईंधन भरने की यह प्रक्रिया जमीन से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर पूरी की गई। इस दौरान विमान की रफ्तार 270 नॉट थी। तेजस के सभी आंतरिक टैंक और ड्रॉप टैंक में ईंधन भरे गए। इससे पहले 4 और 6 सितम्बर को इस परीक्षण के पूर्वाभ्यास के दौरान ड्राइ रन (पूर्वाभ्यास) हुआ था। एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर माधवन ने कहा कि भारत अब विश्व के उन चुनिंदा विशिष्ट देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिसने सैन्य विमान के लिए एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम का विकास किया है।

ग्वालियर में हुआ परीक्षण
तेजस के हवा में ईंधन भरने की यह प्रक्रिया ग्वालियर वायुसैनिक अड्डे पर सुबह 9.30 बजे पूरी की गई। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के दौरान तेजस की कमान नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर (एनएफटीसी) के पायलट विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह ने संभाली। इस दौरान एचएएल और इस विमान का विकास करने वाली वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) के वैज्ञानिक व अधिकारी ग्वालियर स्थित जमीनी स्टेशन से पूरी प्रक्रिया व मानदंडों पर बारीक नजर रख रहे थे। परीक्षण के दौरान विमान का प्रदर्शन सभी मानदंडों पर खरा रहा। मुख्य रूप से ईंधन, उड़ान नियंत्रण प्रणाली आदि का प्रदर्शन डिजाइन जरूरतों के अनरूप और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम के जमीनी परीक्षणों के परिणामों के साथ मेल खाया।

 

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