करोड़ों रुपए की सहायता के बावजूद खस्ताहाल में मण्ड्या शुगर मिल

मण्ड्या में वर्ष 1934 में भारतरत्न सर मोक्ष गुंडम विश्वेश्वरय्या की ओर से स्थापित मण्ड्या शुगर (माइशुगर) चीनी मिल राजनेताओं के लिए अब सोने की खदान बनी है। इस मिल के पुनरुत्थान के नाम पर समय-समय पर राज्य सरकार की ओर से जारी करोड़ो रुपए अनुदान का दुरुपयोग होने से इस मिल के हालत में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।

बेंगलूरु.जिला मुख्यालय मण्ड्या में वर्ष 1934 में भारतरत्न सर मोक्ष गुंडम विश्वेश्वरय्या की ओर से स्थापित मण्ड्या शुगर (माइशुगर) चीनी मिल राजनेताओं के लिए अब सोने की खदान बनी है। इस मिल के पुनरुत्थान के नाम पर समय-समय पर राज्य सरकार की ओर से जारी करोड़ो रुपए अनुदान का दुरुपयोग होने से इस मिल के हालत में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।कभी कभार चीनी के उत्पादन में पूरे राज्य में यह मिल पहले स्थान पर थी। लेकिन आज यह मिल लगभग बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। वर्ष 2017 में कुछ समय चली यह मिल आज फिर बंद हो गई है।इसी मिल के कारण मण्ड्या जिले को चीनी का कटोरा कहा जाता था।
यह मिल बंद होने के कारण जिले के गन्ना उत्पादक किसान परेशान है। गन्ने की पेराई नहीं होने से जिले के सैकडों हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना गत 12 माह से पेराई का इंतजार कर रहा है। जिले के किसान माईशुगर तथा पांडवपुर चीनी मिल को शुरु करने की मांग कर रहें है। लेकिन किसानों की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।हाल में संपन्न विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान जनता दल (एस) के विधान परिषद सदस्य श्रीकंठेगौडा ने यह मिल शुरु करने की मांग को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया था।
इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में राजस्व मंत्री तथा मण्ड्या जिले के प्रभारी मंत्री अशोक ने राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा था की माइशुगर मिल के पुनुरुत्थान के लिए अभी तक कांग्रेस, जनता दल (एस) तथा भाजपा सरकारों ने इतना अनुदान जारी किया है कि इतने अनुदान से माइशुगर जैसी तीन और नई मिल स्थापित की जा सकती थी। किसी भी दल की सरकार को जिले के प्रभावी नेता इस मिल को शुरु करने के लिए राज्य सरकार से पैकेज की घोषणा कराते है। आज तक इस मिल को करोड़ों रुपए की सहायता देने के पश्चात भी हालांत नही सुधरे है इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के नेता जिम्मेदार है।
इस बहस में हस्तक्षेप करते हुए जनता दल (एस) के विप सदस्य बसवराज होरट्टी ने कहा की जनता के राजस्व की बरबादी करने के बदले इस चीनी मिल को बंद किया जाना चाहिए। विधान परिषद के कई सदस्यों ने दलगतराजनीति से उपर उठकर होरट्टी की इस मांग का समर्थन किया था। इस पर राजस्व मंत्री ने कहा कि इस मिल की स्थापना विश्वेश्वरय्या ने की है लिहाजा इस मिल के साथ जिले के किसानों का भावनात्मक लगाव होने के कारण इस मिल को बंद करना तार्किक नहीं होगा।
राजस्व मंत्री के इस जवाब पर विधान परिषद के कई सदस्यों ने इस मिल का निजीकरण करने की सुझाव दिया। लेकिन माइशुगर तथा पांडवपुर दोनों चीनी मिले शुरु होने के कोई संभावना नहीं होने के कारण मण्ड्या जिले के गन्ने की पेरार्ई अब पडोसी तमिलनाडु की चीनी मिल में करने की नौबत आ गई है।

Sanjay Kulkarni
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