येड्डियूरप्पा की वापसी की राह में कई चुनौतियां

येड्डियूरप्पा की वापसी की राह में कई चुनौतियां

| Publish: Apr, 02 2018 05:46:03 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

भरोसा जीतना आसान नहीं

शैलेश पांडेय
बेंगलूरु. भाजपा ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में लिंगायत समुदाय के दिग्गज नेता बीएस येड्डियूरप्पा को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाकर दांव जरूर खेला है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के लिए पार्टी के भरोसे पर खरा उतरना आसान भी नहीं होगा। निसंदेह लिंगायत समुदाय 18 प्रतिशत वोट शेयर के कारण कर्नाटक की राजनीति में अहम स्थान रखता है और कई सीटों पर तो इस समुदाय का सीधा-सीधा प्रभाव भी है। येड्डियूरप्पा राज्य के इस समुदाय के प्रभावशाली नेता भी हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का दांव खेलने के बाद देखना यह है कि येड्डियूरप्पा का अपने समुदाय में वैसा प्रभाव रहता है या नहीं, जैसा उनके मुख्यमंत्री के काल में था।

जल विवाद भी चुनौती
येड्डियूरप्पा के लिए एक अन्य चुनौती गोवा के साथ राज्य का 1980 से महादयी नदी जल विवाद है। उन्होंने पिछले साल वायदा किया था कि गोवा की भाजपा सरकार के साथ मिलकर इस विवाद का कर्नाटक के किसानों के पक्ष में हल निकालेंगे, लेकिन केन्द्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है।

ईश्वरप्पा भी रोड़ा
येड्डियूरप्पा के लिए एक अन्य चुनौती विधानपरिषद में विपक्ष के नेता केएस ईश्वरप्पा से मतभेद भी है। येड्डियूरप्पा के लिए कन्नड अस्मिता के बीच भाजपा को स्थापित करने की चुनौती कठिन हो गई है, क्योंकि हाल ही में कई मौके ऐसे आ चुके हैं, जब उसके नेताओं के कन्नड़ भाषा की अनभिज्ञता से अर्थ का अनर्थ हुआ है।

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गठबंधन नहीं, अकेले चुनाव लड़ेगी शिवसेना
बेंगलूरु. भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की सहयोगी शिवसेना राज्य विधानसभा में अकेले उतरेगी। भाजपा के साथ राज्य मेें उसका कोई गठबंधन नहीं होगा। शिवसेना करीब 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राऊत ने मंबई में रविवार को पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पहले ही अकेले चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी 50 से 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही पार्टी मराठी बहुल इलाकों में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमइएस) का समर्थन करेगी। राउत ने इसके साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से कर्नाटक के मराठी बहुल बेलगावी, कारवार और अन्य इलाकों में चुनाव प्रचार नहीं करने की अपील की है। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद का मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

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