जानिए... कब घटेगी यह दुर्लभ खगोलीय घटना जब सूर्य के आगे नजर आएगा छोटा काला तिल

जानिए... कब घटेगी यह दुर्लभ खगोलीय घटना जब सूर्य के आगे नजर आएगा छोटा काला तिल
सूर्य के आगे नजर आएगा छोटा काला तिल, घटेगी यह दुर्लभ खगोलीय घटना

Rajeev Mishra | Updated: 09 Oct 2019, 06:47:47 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

बुध ग्रह (mercury transit) का दुर्लभ पारगमन अगले माह,

बेंगलूरु. अगले महीने नवम्बर एक बुध पारगमन की एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटेगी। यह घटना भारत के कुछ हिस्सों से देखी जा सकती है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि सूर्य के सामने से ग्रहों का गुजर जाना असाधरण घटनाएं हैं। इन्हें पारगमन कहते हैं। पृथ्वी से देखने पर केवल बुध और शुक्र ग्रह ही पारगमन कर सकते हैं। क्योंकि ये दोनों ग्रह पृथ्वी और सूर्य के बीच रहते हुए ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
उन्होंने बताया कि इन पारगमनों का सीधे देख पाना लगभग असंभव है क्योंकि दोनों ग्रहों का कोणीय आकार सूर्य के मुकाबले बहुत कम है। चूंकि, इन ग्रहों का पथ पृथ्वी के पथ के मुकाबले थोड़े कोणीय झुकाव पर है अत: इनका हमारे सामने से गुजरना तो अनेक बार होता है किंतु पारगमन हर फेरे में नहीं होता। पारगमन के समय यह ग्रह सूर्य के पूर्व से प्रवेश करते हैं और इसके पश्चिमी छोर से होते हुए निकल जाते हैं।
सदी में बुध के 13 पारगमन संभव
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि एक शताब्दी में बुध ग्रह के पारगमन 13 बार हो सकते हैं। पिछला पारगमन 9 मई 2016 को हुआ था। इसकी अवधि 7.5 घंटे थी और इसका प्रमुख भाग भारत से देखा जा सकता था। आगामी 11 नवम्बर को बुध का पारगमन एक बार फिर होने जा रहा है। तब सूर्य तुला तारा समूह में होगा। इस बार पारगमन की अवधि 5 घंटे 29 मिनट है। सूर्य के सामने से गुजरते समय बुध ग्रह का पथ इसके केंद्र से थोड़ा हटकर रहेगा। सूर्य के केंद्र से इसकी न्यूनतम कोणीय दूरी 76 आर्क सेकेंड रहेगी।
यहां से दिखेगा नजारा
वास्तव में जब पारगमन आरंभ होगा तो उस समय भारत के अधिकतम भागों में सूर्यास्त हो जाएगा। पश्चिमी छोर की कुछ जगहों से पारगमन की शुरुआत ठीक सूर्यास्त से कुछ मिनट पहले देखी जा सकेगी। पारगमन की शुरुआत भारतीय समयानुसार 18.05.27 बजे होगी। तब बुध का पश्चिमी किनारा सूर्य के पूर्वी छोर को छुएगा। डेढ़ मिनट बाद, 18.07.08 बजे बुध ग्रह सूर्य के मंडलक में प्रवेश कर जाएगा। तब गुजरात के पश्चिमी हिस्से के कुछ स्थान सैद्धांतिक रूप से इस घटना को देख पाएंगे। कुछ स्थानों पर सूर्यास्त का समय इस प्रकार है द्वारका 18.12 बजे, नालिया 18.11 बजे, पोरबंर 18.10 बजे और लक्षद्वीप के कवरत्ती में 18.13 बजे। यदि दृष्टिरेखा में कोई बादल या पर्वत नहीं है तो पारगमन की शुरुआत वाकई में देख सकते हैं।
उचित फिल्टरयुक्त दूरबीन होगी आवश्यक
प्रोफेसर कपूर ने कहा कि उचित फिल्टर युक्त दूरबीन या बायनाक्युलर से ही देखा जा सकता है। इनकी सहायता से सूर्य के बिम्ब को परिवर्तित करके किसी स्क्रीन पर प्रक्षेपित किया जा सकता है। सूर्य या इस पारगमन को कोरी आंख से या दूरबीन के जरिए सीधा ना देखें। सही फिल्टर का इस्तेमाल करें। हर ऐसी घटना का अपना शैक्षिक मूल्य है। शिक्षण संस्थानों और स्कूलों ने प्रक्षेपण के जरिए पारगमन की घटना देखी या समझाई जा सकती है।

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