बाहरी तारामंडल से आया मेहमान, जानिए कौन है ये

बाहरी तारामंडल से आया मेहमान, जानिए कौन है ये
बाहरी तारामंडल से आया मेहमान, जानिए कौन है ये

Rajeev Mishra | Updated: 12 Sep 2019, 07:09:42 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

विलक्षण है इसकी खूबियां, अद्भूत है इसकी चाल

बेंगलूरु. एक अद्भूत खगोलीय घटनाक्रम के तहत बाहरी तारामंडल का एक धूमकेतु हमारे अपने सौरमंडल में प्रवेश किया है। 'सी/2019क्यू-4' नामक इस धूमकेतु की जब खोज हुई तब यह पृथ्वी से लगभग 3 एयू (1 एयू यानी 15 करोड़ किमी) की दूरी पर था और अब वह 2.7 एयू की दूरी पर है। अगामी 8 दिसम्बर को यह सूर्य के करीब पहुंचेगा।
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि हमसे निकटतम तारामंडली अल्फा सेंटारी है जो हमसे 4.3 प्रकाश वर्ष दूर है और वह लगभग सूर्य के समान है। हम मान सकते हैं कि सूर्य का प्रभाव लगभग दो प्रकाश वर्ष की दूरी तक है और अभी तक हमने उन धूमकेतुओं या वामन ग्रहों से परिचय पाया जो नेप्च्यून ग्रह की कक्षा से बाहर कायपर बेल्ट या करोड़ों धूमकेतुओं वाले ऊर्ट बादल के सदस्य हैं पर हमारे सूर्य के प्रभाव क्षेत्र में ही हैं। परंतु दो सप्ताह पहले ऐसे ही एक नई पिंड का पता चला है। यह एक धूमकेतु है। चमक में बहुत क्षीण (प्लस 18 मैग्नीट्यूड) इसे 30 अगस्त की रात को पर्शियस तारा समूह में एक शौकीया खगोलविद गिनाडी बोरीसोव ने क्रीमियम खगोल वेधशाला से खोज निकाला। इस खोज की महत्ता को आंकना अभी मुश्किल है।
दो पहले भी सामने आया था ऐसा ही एक धूमकेतु
इससे पहले अक्टूबर 2017 में खगोल वैज्ञानिकों ने सौरमंडल में एक नए पिंड को खोज निकाला जो सिगार की शक्ल का था और शायद किसी अन्य तारे के आकर्षण के प्रभाव में छितराकर हमारे सौरमंडल में घुसा चला आया। इस आगमन में हजारों साल लग गए होंगे। इस आगंतुक को अंतर तारकीय माना गया और नाम दिया गया 1आई/उमुवामुवा। चाल चलन में यह अन्य लघु ग्रहों या धूमकेतुओं से अलग था। यह 100 मीटर आकार का है और इसकी तस्वीर को देखकर कुछ लोगों ने इसे दूर अंतरिक्ष से आया अंतरिक्षयान तक मान लिया।

बाहरी तारामंडल से आया मेहमान, जानिए कौन है ये

बाहरी सौरमंडल से चला आया
अब नया धूमकेतु सामने आया है। खोज के समय यह पृथ्वी से 3 एयू की दूरी पर था। तस्वीर में इसकी छोटी सी पूंछ भी नजर आ रही है। चूंकि, तस्वीर धूमकेतु की ली गई इसलिए लंबा एक्सपोजर होने की वजह से तारों ने लकीरें बना दी है। अपने पथ पर अग्रसर यह धूमकेतु 8 दिसम्बर को सूर्य के निकटम से होकर गुजरेगा। तब यह दूरी होगी 2.04 एएयू होगी। प्रोफेसर कपूर ने कहा कि सवाल यह है कि सूर्य के निकट पहुंचने के बाद यह कहां जाएगा। यही बात इस धूमकेतु की सबसे विलक्षण है। उन्होंने बताया कि इसके पथ की उत्केंद्रता 3.52 है जो खोज से 12 दिनों के भीतर लिए गए प्रेक्षणों के आधार पर है। इसके सापेक्ष वृताकार पथ की उत्केंद्रता 0 होती है, दीर्घवृत की 1 से कम होती है और परवलय की 1 के बराबर होती है। जब ये उत्केंद्रता 1 से अधिक होती है तो ऐसा पथ अति परवलयाकार होता है। ऐसे पथ में कोई पिंड किसी अन्य पिंड के आकर्षण क्षेत्र में प्रारंभिक ऊर्जा के साथ ही आता है। अब तक की ज्ञात उत्केंद्रता का अधिकतम मान है 1.1 और इसके मुकाबले इस धूमकेतु की उत्केंद्रता बेहद ज्यादा है। यही बात जताती है कि यह हमारे सौरमंडल के बाहर से चला आया है।
नाभिक का आकार 10 किमी तक
वर्तमान में यह सूर्य से 2.7 एएयू पर है और इसके पथ पर सूर्य के आकर्षण का कुछ तो प्रभाव पड़ेगा और उसके पथ में थोड़ा विचलन भी आएगा। सूर्य से निकट से होकर गुजरते समय इसकी चमक बढ़कर प्लस 14 मैग्नीट्यूट हो जाएगी तब 10 से 12 इंच या इससे बड़े दूरदर्शी से इसे देखा और बेहतर अध्ययन किया जा सकेगा। इस धूमकेतु के नाभिक का आकार 10 किलोमीटर हो सकता है। इसके खोज कर्ता बोरीसोव ने अनेक पृथ्वी निकट पिंड खोजे हैं जिनमें 7 धूमकेतु हैं। अगले कुछ महीनों के अध्ययन से इस धूमकेतु की सही प्रकृति का पता चल पाएगा।

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