हमारा वोट तय करेगा भारत का भविष्य

हमारा वोट तय करेगा भारत का भविष्य

Santosh Kumar Pandey | Publish: Apr, 17 2019 09:30:02 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 09:30:03 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

हमारा वोट ही भारत का भविष्य तय करेगा। इसलिए १८ अप्रेल को बेंगलूरु सहित कर्नाटक की जिन १४ संसदीय सीटों पर चुनाव हो रहे हैं वहां प्रत्येक मतदाता को न सिर्फ अनिवार्य रूप से मतदान करना चाहिए बल्कि दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। ‘राजस्थान पत्रिका’ के जागो जनमत अभियान में मतदाताओं ने उपर्युक्त बातें कहीं।

राजस्थान पत्रिका के जागो जनमत अभियान में मतदाताओं ने भरी हुंकार
बेंगलूरु. हमारा वोट ही भारत का भविष्य तय करेगा। इसलिए १८ अप्रेल को बेंगलूरु सहित कर्नाटक की जिन १४ संसदीय सीटों पर चुनाव हो रहे हैं वहां प्रत्येक मतदाता को न सिर्फ अनिवार्य रूप से मतदान करना चाहिए बल्कि दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। ‘राजस्थान पत्रिका’ के जागो जनमत अभियान में मंगलवार को मतदाताओं ने उपर्युक्त बातें कहीं।

सौ वर्ष पूर्व राजस्थान से बेंगलूरु आने वाले कुछ आरंभिक जैन परिवारों में एक ज्ञानचंद देवड़ा ने मतदान को लोकतंत्र का महापर्व बताते हुए कहा कि मौजूदा दौर के मतदाता अत्यंत जागरुक हैं। वे राजनीतिक दलों के प्रलोभनों में न फंसकर जिम्मेदार, जबवादेह और जनहित में काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को निर्वाचित करें।
वर्ष १९६७ में पहली बार मतदान करने वाले धीरेंद्र कुमार ने कहा देश की जनता ने १९७५ के आपातकाल के बाद मतदाधिकार से ही उस समय के अजेय सत्ताधारियों को बदल दिया था। उन्होंने कहा कि आज के समय में राजनीतिक दल छद्म भेष धरकर जनता को बरगला रहे हैं, यही कारण है कि मतदान को लेकर उदासीनता दिखती है। ऐसे में मतदाताओं को अपने मत की ताकत का अहसास करना चाहिए और सही का निर्वाचन करें ताकि वे जनहित में काम करें।

चुनाव प्रचार में भाषाई मर्यादा तार-तार होने पर चिंता व्यक्त करते हुए बिपिनराम अग्रवाल ने कहा कि आज का युवा वर्ग सबकुछ देख रहा है। पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाता किसी दल या नेता से प्रभावित नहीं दिखते हैं। युवा मतदाताओं की इस चुनाव में अहम भूमिका रहेगी, इसलिए उन्हें अनिवार्य रूप से मतदान करना चाहिए। मनीष खांटेड़ का भी मानना है कि हम सब को अपने बच्चों के भविष्य और देश की समृद्धि के लिए अनिवार्य रूप से मतदान करना चाहिए। सुनील चौहान ने कहा कि यह चिंता की बात है कि मतदान जैसे अधिकार के लिए भी आज लोगों को जागरूक करने की जरूरत आई है।
राजस्थान पत्रिका ने सामाजिक सरोकार में यह एक जिम्मेदारीपूर्ण पहल की है। जागो जनमत में उपस्थित सुनील सांखला, प्रकाश खांटेड़, नवीन रांका आदि ने भी मतदान की महत्ता पर प्रकाश डाला।

सोशल मीडिया के बहकावों से बचें
प्रशांत सिंघी ने कहा कि सोशल मीडिया पर हर विचारधारा के लोग अपनी बात रखते हैं। ऐसे में मतदाताओं को भ्रामकता से बचने की जरूरत है। मतदाता बहकाने वाले पोस्टों में न फंसकर उचित-अनुचित की समझ रखें और सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करें।

बुजुर्ग मां को बनाते हैं पहली मतदाता
दिनेश कांकडिय़ा ने कहा कि कई लोग मतदान के दिन को छुट्टी के रूप में बिताकर समय गंवा देते हैं लेकिन वे हर बार न सिर्फ खुद मतदान करते हैं बल्कि परिवारजनों और पड़ोसियों को भी मतदान कराते हैं। उन्होंने कहा कि मतदान को लेकर मैं काफी उत्साहित रहता हूं और यही कारण है कि मैं अपनी बुजुर्ग मां को हर बार पहली मतदाता के रूप में मतदान केंद्र पर ले जाने का प्रयास करता हूं। इस बार भी उनकी ८२ वर्षीय मां मतदान को लेकर उत्साहित हैं।

कम मतदान होना दुखदायी
बिहार के श्रीकांत शर्मा ने कहा कि प्रजातंत्र के लिए कम मतदान होना दुखदायी है। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में लोग कई प्रकार की तकलीफ झेल कर भी मतदान करते थे लेकिन आज के दौर में सुविधाएं बढऩे के बाद भी लोगों में मतदान को लेकन उत्साह नहीं दिखता है। उन्होंने कविता के माध्यम से कहा, ‘प्रजातंत्र को महफूज रखना है तो, अपने कर्तव्य का बोध समझना होगा, मताधिकार का प्रयोग करके, प्रजातंत्र का मान बढ़ाना होगा।’

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned