शांति और प्रेम भारतीय संस्कृति का प्रतीक - उपराष्ट्रपति

महामस्तकाभिषेक समारोह में सम्मिलित हुए वैंकया नायडू

By: Arvind Mohan Sharma

Published: 10 Feb 2018, 07:14 PM IST

श्रवणबेलगोला। जैन धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक है। यह विश्व में निरंतर सभी जीवों के प्रति अहिंसा और परोपकार का संदेश फैलाता आया है। इसका दर्शन ज्ञान और भक्ति के मार्ग के लिए आत्मिक प्रयास की आवश्यकता पर बल देता है। हमें यह परंपरा निरंतर बनाए रखनी चाहिए। यह बात श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में महामस्तकाभिषेक महोत्सव के चौथे दिन राजकुमार आदिनाथ के राज्याभिषेक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति शांति और प्रेम की प्रतीक है। भगवान महावीर ने अहिंसा और जीयो और जीने दो का संदेश दिया। हमारी भावना वसुधैव कुटुम्बकम् की है और यही हमें विश्व में गौरवान्वित करती है।

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संत पूज्य और पवित्र
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन संत-गुरु, अपना व्यक्तिगत जीवन छोडक़र वर्षभर देश में भ्रमण करते हैं। हजारों किलोमीटर की पदयात्रा करना, सभी वर्ग के लोगों से मिलना, उनके बारे में प्रबोधन करना, यह कार्य कोई असाधारण व्यक्ति ही कर सकता है। इसीलिए हमारी संस्कृति में संतों को पूज्य और पवित्र माना गया है। संतों का प्रवचन सुनना, उनका आशीर्वाद लेना हमारा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्म में से एक है। जैन धर्म सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक आचरण में विश्वास करता है।यह हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है। आज का पवित्र अनुष्ठान भारत एवं संपूर्ण विश्व को एकसूत्र में बांधता है।

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इससे पूर्व उपराष्ट्रपति ने मंच पर पहुंचते ही 330 संतों की वंदना की। राजकुमार आदिनाथ का राज्याभिषेक उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने किया। धार्मिक मंत्रों का उच्चारण श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक चारुकीर्ति भट्टराक स्वामी ने किया। आरंभ में गोमटेश भगवान की स्तुति की गई। महामस्ताकभिषेक के दौरान महोत्सव समिति और भारतीय ज्ञानपीठ के सहयोग सेप्रकाशित 108 धार्मिक ग्रंथों का विमोचन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने किया। यह ग्रंथ हिंदी, अंग्रेजी और कन्नड़ में भाषा में प्रकाशित हुआ है। राजकुमार के राज्याभिषेक के बाद दोपहर में दीक्षा ग्रहण संबधित धार्मिक अनुष्ठान किए गए। कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला, केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार, कर्नाटक सरकार के मंत्री ए. मंजू ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। समापन राष्ट्रगान से किया गया।

 

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नाटक का मंचन
इस अवसर पर नाटक का मंचन किया गया। इसमें नाभिराज ने पुत्र राजकुमार आदिनाथ का राज्याभिषेक किया। 56 देशों के महाराजा इसमें सम्मिलित हुए और राजकुमार का सम्मान किया। राज्याभिषेक के उपरांत राजा आदिनाथ ने अपने मंत्रिमंडल का गठन किया। इसमें राजपुरोहित, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर का विभाजन किया। इस दौरान राजकुमार को राग्य होने और दीक्षा धारण करने का भी मंचन किया गया।

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Arvind Mohan Sharma Desk
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