जल संकट हुआ इतना विकराल कि वन्यजीवों को भी टैंकर से जल आपूर्ति

कोप्पल रेंज के तीन वनों के वन्यजीव पानी नहीं मिलने से त्राहिमाम

By: Priyadarshan Sharma

Published: 20 May 2019, 05:21 PM IST

बेंगलूरु. कोप्पल रेंज के तीन वनों के वन्यजीव पानी नहीं मिलने से त्राहिमाम हैं। भीषण गर्मी के कारण भूजल स्तर कम हो गया है और जल के अन्य स्रोत सूख गए हैं। पानी की खोज में वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर भटकने पर मजबूर हैं। वन्यजीवों को राहत देने के लिए वन विभाग टैंकरों से पानी उपलब्ध करवा रहा है। उप वन संरक्षक यशपाल ने बताया कि वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए विभाग के पास फंड है। गंगावती वन रेंज में चिह्नित जगहों पर गड्ढे खोद कर उनमें सीमेंट कंटेनर रखे गए हैं। टैंकरों की मदद से कंटेनरों में पानी भरा गया है। बेनाकल, कुंतोगी, मुस्तेर, बंकापुरा और बसपट्टण्णा में सीमेंट के १६ कंटेनर लागए जा चुके हैं। कंटेनरों में पर्याप्त पानी है। कोप्पल और कुष्टगी वन रेंज में भी इस तरह की व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की व्यवस्था होने के बाद से वन्यजीवों से कुछ हद तक राहत है।


पेेयजल समस्या से ग्रामीण हब्बा पर संकट
मंड्या. नागमंगला तहसील स्थित लालणकेरे व भिंडगणहल्ली के ग्रामीण इलाके पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति टैंकर के जरिए हो रही है। गांव में टैंकर आने पर पानी के लिए ग्रामीणों की लम्बी लाइन भी लग जाती है। वहीं गर्मी बढऩे के कारण तालाब का जलस्तर घटने के कारण ग्रामीणों को मवेशियों को पानी पिलाने की चिंता सताने लगी है। ग्रामीण लक्ष्मी ने बताया कि पेयजल की समस्या को देखते इस बार गांव में ग्राम हब्बा महोत्सव मनाने पर पुर्नविचार कर रहे हैं। सासंद एल. आर शिवरामे गौड़ा का पैतृक गांव भी लालणकेरे है। ग्रामीणों का कहना है सासंद को दोनों गांवो में आकर लोगों की समस्या सुननी चाहिए। पेयजल अधिकारी रूपा ने बताया कि दोनों गांवों को जिला प्रशासन ने सूखा ग्रस्त घोषित कर दिया है। इसके बाद सरकार द्वारा लोगों की पीने की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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