चाहे राजा हो या रंक कर्म किसी को भी नहीं छोड़ते

अक्कीपेट में धर्मसभा का आयोजन

बेंगलूरु.अक्कीपेट स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ स्थानक भवन में चातुर्मास प्रवचन में पण्डितरत्न ज्ञानमुनि ने उत्तराध्ययनसूत्र में वर्णित कडाण कम्माण न मोक्ख अत्थि का वर्णन करते हुए कहा कि कर्मों का फल भोगे बिना मोक्ष नहीं मिलता है। अनंत बली तीर्थंकरों को भी कर्मों का फल भोगना पड़ा तो हम कैसे छूट सकते हैं? चाहे राजा हो या रंक कर्म किसी को भी नहीं छोड़ते हैं। हम जहां पर है, जिस परिस्थिति में है यह सब हमारे द्वारा किये गए कर्मों का ही फल है। हम अच्छे हैं या बुरे हैं, सुखी हैं या दुखी हैं, पा रहे हैं या गवां रहे हैं ये सब कर्मों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि बोये बीज बबूल का, तो आम कहा से होय, यानी जैसा बीज बोओगे वैसा ही फल मिलेगा। फिर चाहे कितना भी पश्चाताप कर लो, मिलेगा वही जो आपके कर्मों में है। सब कर्मों की माया है, कोई महल में बैठा हुआ सुख ऐश्वर्य का आनंद उठा रहा है, तो कोई वन में टोकरी उठाये भटकता फिर रहा है। न्याय की कमाई होगी तो सुख अवश्य प्राप्त होगा और अन्याय की कमाई कर भी लोगे तो परिणाम स्वरूप दु:ख ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि अपने कर्मों पर विश्वास रखो और आगे किसी का भी भूरा मत करो, सदैव सत्कर्म में लगे रहो जिससे अच्छे कर्मों का ही बंधन होगा। चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी एवं संघ के अध्यक्ष सम्पतराज बढेरा ने सभी का स्वागत किया। प्रारम्भ में लोकेशमुनि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन मोतीलाल ढेलडिय़ा ने किया।

Yogesh Sharma
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