6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए, अब लगी मानसून पर टकटकी

बारां. जुलाई के पहले सप्ताह का मानसून का खास नाता रहा है। जिले में मानसून का आगमन वैसे तो जून माह के दूसरे पखवाड़े में आने का पूर्वानुमान मौसम विभाग लगाता रहा है। लेकिन इस दौरान प्री-मानसून की बारिश से ही लोगों को संतोष करना पड़ता है। बीते ग्यारह बरसों में मानसून जिले में जुलाई माह में दस्तक देता है।

2 min read
Google source verification
देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए, अब लगी मानसून पर टकटकी

देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए, अब लगी मानसून पर टकटकी

बारां. जुलाई के पहले सप्ताह का मानसून का खास नाता रहा है। जिले में मानसून का आगमन वैसे तो जून माह के दूसरे पखवाड़े में आने का पूर्वानुमान मौसम विभाग लगाता रहा है। लेकिन इस दौरान प्री-मानसून की बारिश से ही लोगों को संतोष करना पड़ता है। बीते ग्यारह बरसों में मानसून जिले में जुलाई माह में दस्तक देता है। इनमें एक साल तो पहली जुलाई को बादल इतने झूमकर बरसे थे कि बारां शहर समेत जिले के कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। जबकि बीते वर्ष 2021 में मानसून कर सक्रियता अगस्त माह में बढ़ी थी। बरसात के मामले में जिले के शाहाबाद उपखंड को राजस्थान के चेरापूंजी के नाम से भी जाना जाता रहा है। इस वर्ष अब तक जिले में मानसून सक्रिय नहीं हुआ है। हालांकि मौसम विभाग ने बुधवार से जिले में मानसून के सक्रिय होने के पूरे आसार भी मौसम विभाग ने की हुई है।
छह साल बारिश का खूब धमाल
वर्ष 2011 से 2021 तक पिछले 11 वर्षोँ में जिले में छह साल जिले में बदरा जमकर बरसे हैं। जिले में प्रति वर्ष सामान्तया 750 मिमी औसत बारिश माना जाता है। लेकिन इस अवधि में छह वर्ष ऐसे भी रहे जब औसत बारिश का आंकड़ा 1000 मिमी से अधिक बारिश हुई है। इनमें 2011 में 1507 मिमी्र 2013 में 1599, 2014 में 1124, 2018 में 1088, 20019 में 1121 व वर्ष 2021 में 1297 मिमी औसत बारिश हुई है। जबकि वर्ष वर्ष 2017 में महज 514 मिमी औसत बारिश हुई थी।
2013 व 15 में बाढ़, दो बार बाढ़ जैसे हाल
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों की कहानी देखें तो जिले में लगातार मूसलाधार या फिर एक बार में सौ मिमी से अधिक बारिश होने पर बारां शहर समेत कई निचले क्षेत्रों में बाढ़ अथवा बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। वर्ष 2011 में जिले में 1507 मिमी औसत वार्षिक बारिश हुई थी, तक बाढ़ जैसे हालात बने थे। इसके दो साल बाद 2013 में 1599 मिमी औसत वार्षिक बारिश होने पर बारां शहर समेत कई इलाकों में बाढ़ आ गई थी। बाद में वर्ष 2014 व वर्ष 2021 में भी कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने थे।
सोयाबीन की बुवाई व सिंचाई के लिए दरकार
उपनिदेशक कृषि विस्तार अतीश कुमार शर्मा का कहना है कि कुछ किसानों ने प्री-मानसून के दौरान अच्छी बारिश होने के बाद सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। इसे अब सिंचाई की खासी जरूरत है। वहीं अधिकांश किसान सोयाबीन के लिए बारिश इंतजार कर रहे हैं। आगामी 15 जुलाई तक सोयाबीन की बुवाई के लिए आदर्श समय है।