मांगरोल. तीन सालों व उससे पहले कभी अतिवृष्टि तो कभी कम बरसात तो कभी ओलों की बरसात से साल दर साल नष्ट हो रही सोयाबीन की फसल से किसानों की परेशानी बढ़ रही है। इस बार क्षेत्र में लहसुन की बुवाई पिछले दो सालों से दोगुनी से भी ज्यादा हुई है। खेत में साल में दो फसलें न हो तो किसान के हाथ कुछ नहीं लग पाता है। ऐसे में लहसुन की खेती की ओर इस बार अधिसंख्य किसानों का रुझान ज्यादा है। इस कारण अधिकांश खेतों में लहसुन का रकबा दो गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। इस बार बरसात कम हुई तो सोयाबीन की फसल पहले तो अच्दी दिखती रही खेत अंत तक हरे रहे, कम बरसात का असर यह हुआ कि प्रति बीघा पैदावार कम हुई। इंद्रदेव की मेहरबानी पर निर्भर इस फसल से भी किसान अब उकता से गए हैं।