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बाबू-बाली लगाते थे चौके-छक्के , अब पेन उठाना मुश्किल

बाबू....अण्डर 17 और 19 की क्रिकेट की काल्वीन शील्ड प्रतियोगिता में अपने भाई भवेन्द्र के साथ मैदान में उतरता तो स्थानीय क्रिकेट के दीवाने कहते मार्क वॉ और स्टीव वॉ की जोड़ी आ गई।
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बाड़मेर

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Ratan Dave

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Updated: 25 Feb 2021, 11:53 AM IST

,barmer

बाबू-बाली लगाते थे चौके-छक्के , अब पेन उठाना मुश्किल,बाबू-बाली लगाते थे चौके-छक्के , अब पेन उठाना मुश्किल


बाड़मेर पत्रिका.
बाबू....अण्डर 17 और 19 की क्रिकेट की काल्वीन शील्ड प्रतियोगिता में अपने भाई भवेन्द्र के साथ मैदान में उतरता तो स्थानीय क्रिकेट के दीवाने कहते मार्क वॉ और स्टीव वॉ की जोड़ी आ गई। फिर चौकों-छक्कों की बारिश होती तो बाड़मेर के संजय स्टेडियम में 2003 से 2010 के दौर में क्रिकेट के दीवानों की हूटिंग बाबू-भवेन्द्र के शॉट की दीवानगी को चरम तक जीती थी। यही स्थिति इन दोनों भाइयों की छोटी ***** बाली की थी जो क्रिकेट और हैण्डबॉल की खिलाड़ी मैदान में उतरती तो गर्मजोशी चारों ओर फैल जाती,लेकिन बाबू और बाली आज दोनों बिस्तर पर है। मस्कूलर डिस्ऑर्डर ने दोनों भाई ***** की मांसपेशियों को इतना कमजोर कर दिया है कि पहले क्रिकेट का बल्ला छूटा और अब तो हालत यह है कि पेन भी नहीं पकड़ सकते है। दोनों को जांच और इलाज की दरकार है। ललित सोनी की बाड़मेर में हुई मदद ने इन दोनों की आस को जगाया है कि सरकार उनके द्वार भी आएगी।
बाड़मेर का इसे सबसे बेहतरीन क्रिकेटर परिवार कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। नेहरू नगर निवासी धर्माराम जाखड़ के बेटों में क्रिकेट की दीवानगी रही तो पिता ने इनको हमेशा आगे बढ़ाया। बाड़मेर की क्रिकेट में भवेन्द्र और बाबू दो बेहतरीन खिलाड़ी दिए, जो कॉल्विन शिल्ड प्रतियोगिता के दौर में पहुंचे। अण्डर 17 और अण्डर 19 क्रिकेट में इन्होंने खुद को साबित किया। लेकिन इन्हें क्या पता था कि विकेट पर दौडऩे वाले उनके बेटे-बेटी जिंदगी की पिच पर कमजोर होने वाले है।
बाबू को यों बीमारी ने घेरा
वर्ष 2009-10 में बाबू के हाथ से अचानक खेलते हुए बल्ला फिसलने लगा। बाबू को अखरा तो उसने इसके लिए चिकित्सकों के बात की। बताया कि मांसपेशियों में केाई दिक्कत है। अहमदबाद, मुम्बई व अन्यत्र जांच करवाई तो मस्कूलर डिस्ऑर्डर बताया गया। इस बीमारी ने बाबू का क्रिकेट छुड़वा दिया तो उसने स्कॉरर के लिए आवेदन किया। क्रिकेट के शौक को जिंदा रखते हुए वह स्कोर लिखने लगा। करीब सात साल तक यह कार्य करते हुए उपचार करवाता रहा लेकिन कोइ हल नहीं निकला। 2017 में तो उसके हाथ में पेन पकडऩे की ताकत नहीं रही। वह कहता है कि शरीर में कोई दर्द नहीं हो रहा है लेकिन उसके हाथ-पांव अब काम नहीं करते है। वह बिस्तर पर है।
बाली बहुत कमजोर हो गई
कॉलेज में हैण्डबॉल ऑल इंडिया प्लेयर और क्रिकेट की बेहतरीन खिलाड़ी बाली की जिंदगी खुश थी। उसकी शादी हो गई। जोधपुर में परिवार के साथ रह रही थी लेकिन उसको भी इस बीमारी ने घेर लिया। बाली के परिवार ने कई जगह जांच करवाई लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। बाली को भी सरकार से ही उम्मीद है कि उपचार के लिए कोई आस दिखाए तो उसकी छोटी बेटी के सिर पर उसका हाथ हमेशा रहे। वह अपनी बेटी को भी बेहतरीन खिलाड़ी बनाना चाहती है लेकिन वो कहती है, मैं मैदान में नहीं हूं...।
किस्मत ने बड़ा खेल खेल दिया...सरकार सुनो
हम मैदान में बेहतर खेल रहे थे लेकिन किस्मत ने बड़ा खेल हमारे साथ खेल दिया। दोनों भाई ***** बिस्तर पर है। ललित के लिए हुए उपचार ने हमारी उम्मीद को बढ़ाया है। सरकार मददगार बने तो उपचार हो सकता है। क्रिकेट के दीवानों और आम लोगों से भी कहूंगा कि मेरे भाई-बहिन के लिए प्रार्थनाएं और सहायता करें। खिलाड़ी कभी नहीं हारते है, पर यहां आकर क्या करें? - भवेन्द्र जाखड़, बाबू का भाई