8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बाड़मेर में खुलेगा देश का पहला बाजरा अनुसंधान संस्थान! जानिए पूरी खबर

- आईसीआर जोधपुर ने प्रशासन को पत्र भेजा, बाड़मेर जिले में मांगी सौ एकड़ जमीन, प्रदेश में बाजरा उत्पादन में बाड़मेर अव्वल
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बाड़मेर

•

image

bhawani singh

•

Updated: 27 Feb 2021, 9:34 PM IST

Barmer news

Barmer news

भवानीसिंह राठौड़@बाड़मेर.
बाड़मेर प्रदेश में सर्वाधिक बाजरे की बुवाई (9.50 लाख हैक्टेयर) कर रहा है, उत्पादन भी 5 लाख 86 हजार मेट्रिक टन है। इतना बाजरा बोने की वजह से अब बाड़मेर को देश के पहले बाजरा अनुसांधन संस्थान की सौगात मिलने के संकेत है। अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना ने इसके लिए 100 एकड़ जमीन जिला प्रशासन से मांग ली है। यह अनुसंधान प्रदेश को बाजरे के बीज और उत्पादन को लेकर स्वावलंबी बनाने का बड़ा कदम होगा।


बाजरा मारवाड़ का प्रमुख खाद्य है और इसका उत्पादन इसी कारण बरसों से यहां सर्वाधिक हो रहा है। बाजरे के उत्पादन के बावजूद रेगिस्तान के इलाके में गुणवत्तता के बीज और बाजरे की उन्नत किस्म के लिए गुजरात व अन्य राज्यों के भरोसे किसान रहा है लेकिन अब खुशखबर है कि रेगिस्तान के मुख्य उत्पाद बाजरा के लिए यहीं पर अनुसंधान संस्थान खोलने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है।


यह होगा फायदा
जिले में बाजरा अनुसंधान संस्थान खुलने से बाजरे की जैव विविधता, उच्च गुणवत्ता युक्त वाजिब दाम, प्रमाणित बीज, मूल्य संवर्धन आधारित बाजरा, बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्थान, बीजों के व्यापार संबंधित उद्योग व कृषि आधारित कुटीर उद्योग का विकास होगा। साथ ही किसानों की आय में वृद्धि के साथ रोजगार के साधन भी बढ़ जाएगें।


देश का पहला
भारत सरकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से अन्य अनाज के अनुसंधान संस्थान है, लेकिन बाजरा को लेकर कोई संस्थान देश में नहीं है। इसका फायदा राजस्थान, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के किसानों को फायदा मिलेगा। साथ ही नकली बीज विक्रेताओं के चंगुल से भी किसान बच सकेंगे।


- जमीन मांगी है,
बाजरा उत्पादन को देखते हुए बाड़मेर जिले में बाजारा अनुसंधन संस्थान प्रस्तावित है। इसके लिए हमने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर सौ एकड़ जमीन मांगी है। जमीन व वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। - डॉ. तारा सत्यवती, प्रोजेक्ट कॉडिज़्नेटर, अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना, जोधपुर
---