प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में करीब नौ सौ राजस्व गांव सृजित कर लिए गए, यहां बसे लोग भी सड़क, बिजली और पानी से जुड़े

प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में करीब नौ सौ राजस्व गांव सृजित कर लिए गए, यहां बसे लोग भी सड़क, बिजली और पानी से जुड़े

Vijay ram | Publish: Aug, 13 2018 08:16:03 AM (IST) Barmer, Rajasthan, India

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बाड़मेर.
मामे रो ब्याव और मां पुरसण वाली की कहावत बाड़मेर जिले पर लागू हो रही है। वर्ष २००८ से अब तक करीब नौ साल से लगातार प्रदेश में राजस्व मंत्री बाड़मेर जिले से है और इस कार्यकाल में प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में करीब नौ सौ राजस्व गांव सृजित कर लिए गए है। राजस्व गांव बनने से जिले के दुरूह और ढाणियों में बसे लोग सड़क, बिजली और पानी से जुड़े है।

 

वर्ष २००८ से २०१३ तक गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी प्रदेश में राजस्व मंत्री रहे। चौधरी ने अपने कार्यकाल में सर्वाधिक राजस्व गांव बनाने का रिकार्ड कायम कर लिया। उस समय १९७८ राजस्व गांव थे। २०१३ में इन गांवों की सं या २५९३ हो गई। हेमाराम
चौधरी का कार्यकाल ात्म होते ही राजस्व मंत्रालय फिर बाड़मेर जिले को मिल गया और पचपदरा विधायक अमराराम चौधरी राजस्व मंत्री हो गए। वर्ष २०१४ से अब तक २८०८ राजस्व गांव हो गए है।

 

गंगाराम चौधरी ने की थी शुरूआत-
जिले से गंगाराम चौधरी पहले राजस्व मंत्री रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में जिले में राजस्व गांव बडे़ स्तर पर बनाए थे,हालांकि उनकी सं या हेमाराम चौधरी के कार्यकाल के गांवों से कम रही है।

 

क्या हुआ फायदा-
बाड़मेर जिले में ४८९ ग्राम पंचायतें है। पटवारमण्डल ३९७ है। इन पटवार मण्डल में पहले गांवों की सं या कम
होने पर सरकारी योजना का ला ा ढाणियों तक नहीं पहुंच पाता था। छितराए बसे लोगों को मूल ाूत सुविधाओं सड़क,पानी, बिजली से जोडऩे के लिए न्यूनतम इकाई राजस्व गांव माना जा रहा था। एेसे में प्रधानमंत्री सड़कों के आने के बाद राजस्व गांवों
की सं या लगातार बढ़ाई गई और इससे इन गांवों में सुविधाएं मिली है।

 

बाड़मेर को छूट भी-
राजस्व गांव के गठन के लिए न्यूतम आबादी २५० है लेकिन बाड़मेर- जैसलमेर के लिए २०० की आबादी मान्य है।
राजस्व गांव के गठन के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव ोजती है।
तहसीलदार की रिपोर्ट पर जिला कलक्टर की ओर से राजस्व मंडल को प्रस्ताव ोजा जाता है। राजस्व मंत्रालय की अनुमति पर राज्य सरकार गांव घोषित करती है।

 

एेसे बढ़े राजस्व गांव
२००८- १९७८
२००९-२१६०
२०१०-२४६४
२०११-२४६४
२०१२-२५१३

२०१३-२५९३
२०१४-२७१२

२०१५-२७१९
२०१६-२७२६

२०१७-२७८०
२०१८-२८०८

 

राजस्व गांव का गठन नियमानुसार-
राजस्व गांव का गठन के लिए प्रक्रिया तय है जिसको अपनाया जाता है। जिले में ज्यादा गांव बनने से लोगों को मूल ाूत सुविधाएं ज्यादा मिल रही है। ढाणियों की बजाय गांव तक बिजली,पानी, सड़क की योजनाएं ले जाना आसान है।
— शिव प्रसाद मदन नकाते, जिला कलक्टर बाड़मेर
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