डूब से टकराने को तैयार बांध प्रभावित, शुरू किया सत्याग्रह

डूब से टकराने को तैयार बांध प्रभावित, शुरू किया सत्याग्रह
Gate of Sardar Sarovar Dam, Narmada Bachao Andolan

Manish Arora | Updated: 08 Aug 2019, 10:57:59 AM (IST) Barwani, Barwani, Madhya Pradesh, India

राजघाट पर जुटे हजारों डूब प्रभावित, कहा अपना हक लेकर रहेंगे, बांध को भरने से रोकने की मांग, बिना पुनर्वास नहीं हटेंगे प्रभावित, नर्मदा के जल स्तर में बढ़ोत्तरी जारी, पहुंचा 127.500 मीटर पर

बड़वानी. सरदार सरोवर बांध के गेट लगे होने से लगातार बढ़ रहे बैक वॉटर से डूब गांवों में पानी आने का खतरा मंडरा रहा है। बांध के गेट खोलने की मांग को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन ने अपना मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को नबआं और डूब में आ रहे गांवों के प्रभावितों ने नर्मदा तट राजघाट पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आरंभ कर दिया है। प्रभावितों का कहना है कि वे डूब से टकराने को तैयार है, लेकिन बिना मुआवजा और उचित पुनर्वास के अपने अधिकार को लिए बिना हटने को तैयार नहीं है। या तो सरकार बांध में पानी भरना रोके या फिर सबका उचित पुनर्वास करें।
नबआं नेत्री मेधा पाटकर ने बताया कि आंदोलन ने सरकार के सामने पिछले 6 माह पहले 30 मुद्दे रखे थे। जिन पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अब डूब लोगों के घरों तक आना शुरू हो गई है। इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जब तक सभी का संपूर्ण पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम अभी भी मप्र सरकार को समय दे रहे हैं कि वे बारी-बारी हर गांव में शिविर आयोजित करें और लोगों की समस्याओं का निराकरण करें। हम यहां डूबने के लिए तैयार बैठे है। मप्र सरकार को चाहिए कि केंद्र और गुजरात सरकार से सरदार सरोवर बांध के गेट खुलवाए और गैरकानूनी रूप से आ रही इस डूब को रोके। डूब आए या बाढ़, हम नहीं हटेंगे, जीने का अधिकार ले के रहेंगे।
पुल पर आया पानी, फिर भी नहीं रुके कदम
नबआं के सत्याग्रह में डूब गांवों के प्रभावित बुधवार सुबह से ही राजघाट पहुंचना आरंभ हो गए थे। धार जिले के चिखल्दा, कड़माल, निसरपुर आदि क्षेत्रों से आने का एक ही रास्ता राजघाट पुल पर पानी आने के बाद भी डूब प्रभावितों के कदम नहीं रुके। पुल पर भरे पानी से ही डूब प्रभावित पैदल चलकर राजघाट पहुंचे। वहीं, कई प्रभावित नावों के रास्ते नदी पार कर राजघाट आए। दिनभर चले रिमझिम बारिश और शाम से हुई तेज बारिश के बाद भी नबआं और डूब प्रभावितों का सत्याग्रह जारी रहा। नबआं कार्यकर्ता राहुल यादव ने बताया कि गुरुवार से हर गांव के लोग यहां पहुंचेंगे। बुधवार को हुए सत्याग्रह में भागीराम पाटीदार, दयाराम यादव, रामेश्वर भिलाला, श्यामा भारत मछुआरा, भागीरथ धनगर, वाहिद मंसूरी, शनोबर मंसूरी, जगदीश पटेल, सुरेश प्रधान, देवराम कनेरा, रणवीर तोमर, देवेसिंग तोमर, कैलाश यादव, कमला यादव ने भी संबोधित किया।
कलेक्टर, एसपी ने देखी टीन शेड की व्यवस्थाएं
नर्मदा के बढ़ते जल स्तर को लेकर बुधवार को कलेक्टर अमित तोमर, एसपी डीआर तेनीवार ने अंजड़, पाटी नाका बड़वानी एवं सौंदूल में बनाए गए अस्थाई टीन शेड का पुन: निरीक्षण किया। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने इन केंद्रों के निरीक्षण के दौरान शौचालयों, बाथरूम, रहवासी कक्ष का दरवाजा खोल-खोलकर उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा। साथ ही स्टैंड के माध्यम से उपलब्ध कराए गए पेयजल व्यवस्था का आकलन भी नल की टोंटी को घूमाकर देखा। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने इन स्थलों के बनाए गए प्रभारी अधिकारियों से भी चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। वहीं, कलेक्टर ने डूब प्रभावित ग्रामों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों एवं उनके मताहत कार्यरत टीम के सदस्यों को 24 घंटे सजग एवं सतर्क रहने के निर्देश दिए है।
आंदोलन ने रखे ये मुद्दे
-लंबित आवेदनों पर निर्णय लेकर शासकीय आदेश निकाले जाए।
-नर्मदा को जीवित रखने, अविरल बहने देने के लिए पुनर्विचार किया जाए।
-नर्मदा लिंक परियोजनाओं पर रोक लगाने के लिए मप्र शासन निर्णय करें।
-बांध की लाभ-हानि, पर्यावरणीय असर पर संपूर्ण जांच और विचार किया जाए।
-उच्च स्तरीय समिति का गठन हो जिसके सदस्य, शासन और आंदोलन मिलकर निर्णय ले।
-बरगी से लेकर सरदार सरोवर बांध तक के विस्थापितों का संपूर्ण पुनर्वास हो।
-एनवीडीए के भ्रष्टाचारी अधिकारियों को हटाकर संवादशील, विकास को मानने वाले अधिकारियों को रखा जाए।
-अवैध रेत खनन, पेड़ों की कटाई न कर वैकल्पिक वनीकरण के झूठे दावे मंजूर न करे।
-खेती आधारित उद्योग लगाए जाए, स्थानीय युवाओं को रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराए जाए।
ये रहा नर्मदा का जल स्तर
127.250 सुबह 6 बजे
127.350 दोपहर 12 बजे
127.500 शाम 6 बजे
बीडी 0810 फोटो

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