बच्चा बन गया मेंढक, देखते रह गए लोग

पलाश के पत्तों से ढंके बच्चे को मेंढक का प्रतीक मानकर पूजन करने की वर्षों पुरानी परंपरा
डोडगली अमावस्या पर अच्छी बारिश के लिए बच्चों ने मांगा दान

By: tarunendra chauhan

Updated: 24 May 2020, 07:09 PM IST

बड़वानी. वर्षा काल में अच्छी बारिश हो इसके लिए निमाड़ अंचल में ज्येष्ठ मास की अमावस्या को डोडगली अमावस के रूप में मनाने की वर्षों पुरानी परंपरा है। इस परंपरा में गांव के बच्चे और किशोर एकत्र होते हैं और फिर एक बच्चे को सिर से पांव पर रस्सी के सहारे पलाश के पत्तों से ढंककर टोली घर-घर दान मांगने जाते हैं। टोली में पलाश पत्तों से ढंके बच्चे को डेडर या मेंढक का प्रतीक मानकर लोग जल और अक्षत के साथ पूजन करते हैं और टोली के बच्चों को दान देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा करने से वर्षा काल के चार माह बारिश अच्छी होती है। इस परंपरा के अनुसार बच्चों की टोली शुक्रवार को लोकगीत गाते हुए घर-घर दान मांगने पहुंची, जहां लोगों ने पलाश से अच्छादित बच्चे की पूजा कर दान देकर अच्छी बारिश की कामना की। ग्रामीण आरपी पालीवाल ने बताया कि यह परंपरा निमाड़ में कई पीढिय़ों से चली आई है। इस परंपरा का निर्वहन कर लोगों को अच्छी बारिश होने की संभावना रहती है। इसलिए हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को डोडगली अमावस के रूप में मनाया जाता है।

बच्चों को परंपरा की मिलती है सीख
निमाड़ अंचल में अमावस्या को डोडगली अमावस के रूप में मनाने की परंपरा है। गांव के किशोरों का कहना है कि इस त्योहार को मनाकर हमारे अंचल में प्रचलित वर्षों पुरानी परंपरा को जानने का मौका मिलता है। परंपरा के तहत निमाड़ के हर गांव में किशोर व बच्चों का समूह अपने में से ही एक बच्चे को पलाश के पत्तों से ढाककर तथा रस्सी से बांध गांव की गलियों व मोहल्लों में घूमते हैं। पलाश के पत्तों से ढंके बच्चे को डेडर (मेेंढक) का प्रतीक मानकर बड़ व बुजुर्ग पूजन कर अच्छी बारिश की कामना करते हैं।
पलाश के पत्तों से ढंका बच्चा, बच्चे।
बीडी 2305 फोटो

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tarunendra chauhan Desk
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