दिल्ली तक कॉरिडोर से जुड़ेगा जमवारामगढ़ अभयारण्य

अंडरपास से जमवारामगढ़ सेंचुरी तक देश का पहला शहरी वन्यजीव गलियारा बन जाएगा।

By: vinod sharma

Published: 25 Sep 2021, 12:00 AM IST

अभिषेक सिंघल
जयपुर. जयपुर से दिल्ली तक वाहनों का आवागमन आम बात है। जल्द ही जयपुर के वन्य जीव भी दिल्ली तक चक्कर लगा सकेंगे। दिल्ली के असोला भाटी सेंचुरी के पास बन रहे अंडरपास से जमवारामगढ़ सेंचुरी तक देश का पहला शहरी वन्यजीव गलियारा बन जाएगा। वन विभाग जमवारामगढ़ को विकसित करने के लिए योजना बनाने में जुट गया है। जिसमें डगोता, सानकोटड़ा ब्लॉक में टूरिज्म सफारी शुरू करने का प्रस्ताव भी है।
इस गलियारे के तहत दिल्ली सरकार असोला भाटी सेंचुरी को गुरुग्राम-रेवाड़ी से जोड़ रही है। सरिस्का अरावली के जरिए पहले ही जुड़ा है। जमवारामगढ़ के डगोता व सानकोटड़ा सरिस्का के बफर जोन में है। जमवारामगढ़ के अचरोल से कनेक्टिविटी के बाद यह गलियारा जयपुर-दिल्ली कॉरिडोर बन जाएगा। अभी झालाना के तेंदुए अचरोल तक जा रहे हैं।

डगोता सानकोटड़ा में बढ़ सकती है बाघ की आबादी:
वन विभाग डगोता नाका, सानकोटड़ा नाका क्षेत्र में बाघ की आबादी बढाऩे पर काम कर रहा है। अभी सरिस्का में 23 बाघ हैं और वर्तमान स्थिति में 30 से 35 बाघ ही रह पाएंगे। इसके बाद बाहर का रुख कर सकते हैं। इधर, वन्य जीवों के पानी पीने के लिए जमवारामगढ़ में 13 वाटर हॉल चिन्हित किए जा चुके हैं और विभाग 12 अन्य अस्थायी वाटर हॉल विकसित कर रहा है। डगोता नाका क्षेत्र में सरिस्का से एसटी-15 ने करीब चालीस दिन तक डगोता नाल, वायरलैस टावर, व संज्यानाथ माल क्षेत्र में डेरा डाला था।

खनन गतिविधि है विकास में बाधा---
सानकोटड़ा नाका व डगोता नाका क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक मार्बल की खदान संचालित हो रही थीं। सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2002-03 खदान बंद करने के आदेश के बाद खदानें बंद तो हुईं लेकिन खदानों में पड़े मार्बल स्लैब को ले जाने की अनुमति होने से यहां अभी भी वाहनों और भारी मशीनरी का आना जाना है। स्लैब के लिए ब्लास्टिंग भी होती है। जिससे वन्य जीवों के आवागमन में खलल पड़ता है। सरिस्का से जमवारामगढ़ के बीच ऐसी कई खानें पड़ती हैं। जिनमें अभी भी खनन गतिविधियां हो रही हैं।

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