मगर आज यह नदी अपने अस्तित्व को लेकर खतरे मे हैं, पानी को तरस रही मां सीता की प्यास बुझाने वाली रामरेखा जनपद की धरती पर भगवान राम के समय के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल अब उपेक्षा का शिकार हो गए हैं। यहां के लोग यह कहने में काफी गर्व महसूस करते हैं कि राजा दशरथ का पुत्रकामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा, भगवान राम की बहन शांता की तपोस्थली श्रृंगीनारी, अयोध्या का प्रवेश द्वार जहां हनुमान जी पहरा देते थे हनुमानबाग चकोही, राम-जानकी मार्ग यहीं पर है। मखौड़ा को छोड़ अन्य सभी स्थल वीरान और उजाड़ पड़े हैं। इन्हीं प्राचीन धरोहरों में से एक है रामरेखा नदी। स्थानीय जनश्रुतियों को यदि सही मानें तो इस नदी ने कभी जगत जननी मां जानकी की प्यास बुझाई थी।